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नई दिल्ली

पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं पिछले साल से कम

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 08:00 PM
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं पिछले साल से कम

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के आंकड़ों में यह दावा किया गया

मानसून की वापसी के बाद खेतों में पराली जलाने के मामलों में वृद्धि हुई

नई दिल्ली। एजेंसी

उत्तर भारत से मानसून की वापसी के बाद पंजाब और हरियाणा में खेतों में पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लेकिन स्थिति पिछले साल की तुलना में अब तक हालात बेहतर हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई।

पंद्रह सितंबर से 10 अक्तूबर तक पंजाब में पराली चलाने की 764 घटनाएं दर्ज की गईं जबकि पिछले साल इसी अवधि में ऐसी 2,586 घटनाएं सामने आई थीं। संबंधित अवधि में हरियाणा में पराली जलाने की 196 घटनाएं हुईं जबकि पिछले साल इस दौरान ऐसे 353 मामले सामने आए थे।

आईएआरआई आंकड़ा दर्शाता है कि छह अक्तूबर तक पराली जलाने की घटनाएं बहुत कम थीं। छह अक्तूबर को दक्षिण पश्चिम मानसून पश्चिमोत्तर भारत से लौटने लगा था। पंजाब में एक अक्तूबर से पांच अक्तूबर तक पराली जलाने के बस 63 मामले सामने आये जबकि छह अक्तूबर से 10 अक्तूबर तक ऐसे 486 मामले सामने आए। इसी प्रकार हरियाणा में एक अक्तूबर से पांच अक्तूबर तक पराली जलाने के बस 17 मामले सामने आये जबकि छह अक्तूबर से 10 अक्तूबर तक ऐसे 172 मामले सामने आए।

फसल की कटाई देर से शुरू हुई

संस्थान के वैज्ञानिक विनय सहगल ने बताया कि अक्तूबर के पहले सप्ताह में पराली जलाने के कम मामले सामने आए। उसकी वजह यह थी कि मानसून की देर से वापसी के कारण फसल की कटाई विलंब से शुरू हुई। उन्होंने जमीनी स्तर से प्राप्त रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा,‘यहां तक, जिन किसानों ने फसल कटाई कर ली थी उन्होंने भी पराली नहीं जलाई, क्योंकि वह गीली थी। सहगल ने कहा कि आईएआरआई को उम्मीद है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस सीजन में पराली जलाने की घटनाएं कम होंगी।

सरकार पराली प्रबंधन को लेकर सचेत

उन्होंने कहा,‘सरकार इस बार पराली प्रबंधन को लेकर अधिक सचेत है। यह भी पिछले साल बहुत सारे किसानों ने (कृषि कानूनों के विरोध में) में पराली जलाई थी। सहगल ने कहा कि पराली जलाने की घटनाएं छह अक्तूबर से बढ़ी हैं लेकिन दैनिक आंकड़े 2020 की तुलना में अब भी कम हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों में 2016 से 2019 तक पराली जलाने के मामले कम होते गए। पिछले साल उसमें वृद्धि की वजह कृषकों का प्रदर्शन हो सकता है। उन्होंने कहा,‘हम 2019 से बेहतर की आस नहीं कर सकते लेकिन उम्मीद है कि पिछले साल की तुलना में आंकड़े कम होंगे।

पिछले सालों में पराली जलाने की हुई घटनाएं

पंजाब में पहली अक्तूबर से 30 नवंबर तक 2016 में पराली जलाने की 1.02 लाख, 2017 में 67,079 , 2018 में 59,684 और 2019 में 59,684 घटनाएं हुई थीं। उसी प्रकार, हरियाणा में पहली अक्तूबर से 30 नवंबर तक 2016 में पराली जलाने की 15,686 , 2017 में 13,085 , 2018 में 9,225 और 2019 में 6,364 और 2020 में 5,678 घटनाएं हुई थीं। पंजाब और हरियाणा अक्तूबर एवं नवंबर में धान की फसल की कटाई के दौरान पराली जलाने के कारण लोगों का ध्यान आकृष्ट करते हैं।

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