
नमक की कमी से परेशान हाथी, गैंडे और जिराफ
ज्यूरिख के शोधकर्ताओं ने पाया है कि हाथी, गैंडे और जिराफ जैसे बड़े शाकाहारी जानवरों को उनके प्राकृतिक आवासों में आवश्यक सोडियम नहीं मिलता है, जिससे उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। सोडियम की कमी से जानवर इंसानी बस्तियों में घुसकर टकराव का कारण बनते हैं। संरक्षण के लिए कृत्रिम नमक स्रोतों की जरूरत है।
ज्यूरिख, एजेंसी। हाथी, गैंडे और जिराफ जैसे बड़े शाकाहारी जानवरों को अपने प्राकृतिक आवासों में अक्सर जरूरी सोडियम (नमक) नहीं मिल पाता है, जिससे उनका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। दरअसल, जंगली जानवरों को जीवित रहने के लिए सोडियम की आवश्यकता होती है, लेकिन कई इलाकों में पौधों और मिट्टी में इसकी कमी होती है। यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिख के शोधकर्ताओं ने पौधों में सोडियम के स्तर और जानवरों के मल के नमूनों का अध्ययन किया, जिससे पता चला कि बड़े जानवरों में इसकी कमी का खतरा अधिक होता है। सोडियम की तलाश में, ये जानवर लंबी दूरी तय करते हैं, जैसे केन्या में हाथी गुफाओं में खनिज युक्त चट्टानें खाते हैं, या कांगो में नदी के तल में खुदाई करते हैं।
उनका मानना है कि पश्चिमी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में बड़े शाकाहारी जानवरों की कम आबादी का एक कारण यह सोडियम की कमी हो सकती है। यह जानकारी वन्यजीवों के वितरण पैटर्न को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। सोडियम की कमी से जानवर अक्सर नमक की तलाश में इंसानी बस्तियों में घुस जाते हैं, जिससे लोगों और जंगली जानवरों के बीच टकराव बढ़ जाता है। इसलिए संरक्षण रणनीतियों में कृत्रिम नमक के स्रोत (जैसे बोरहोल या नमक चाटने की जगहें) उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए। यह सुनिश्चित करना कि जानवरों को पर्याप्त सोडियम मिले, उनके जीवित रहने की दर और सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

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