खाड़ी संकट से उद्योगों पर दबाव को कम करने के लिए जल्द ऐलान संभव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारत की अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्ग और सप्लाई चेन प्रभावित होने से कई सेक्टर दबाव में हैं। सरकार प्रभावित उद्योगों को राहत देने के लिए कर्ज की किस्तों पर अस्थाई राहत और लोन मोराटोरियम पर विचार कर रही है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। पश्चिम एशिया (खाड़ी) में जारी संघर्ष का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्ग और सप्लाई चेन प्रभावित होने से कई सेक्टर दबाव में आ गए हैं। इसी बीच केंद्र सरकार प्रभावित उद्योगों को राहत देने के लिए बड़े कदमों पर विचार कर रही है, जिनमें कर्ज की किस्तों (ईएमआई ) पर अस्थाई राहत भी शामिल है। इसके साथ ही, कुछ अन्य राहत विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि सरकार तीन महीने तक के लिए लोन मोराटोरियम (किस्त स्थगन) देने पर विचार कर रही है।
इसके तहत कंपनियों और कारोबारियों को कुछ समय तक ईएमआई नहीं चुकानी होगी, जिससे उनकी नकदी (कैश फ्लो) पर दबाव कम हो सके। उद्योग जगत, खासकर निर्यातकों और एमएसएमई क्षेत्र ने भी सरकार और आरबीआई से इसी तरह की राहत की मांग की है। उद्योग जगत का कहना है कि पश्चिमी एशिया में युद्ध थमने के बाद भी व्यापारिक लिहाज से हालात सामान्य होने में लंबा वक्त लगेगा। लंबे समय तक चले युद्ध के कारण बढ़ती लागत, महंगे ईंधन और बाधित सप्लाई चेन के कारण कारोबार पर गंभीर असर पड़ा है। ऐसे में कर्ज भुगतान में राहत जरूरी है। सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में कई दौर की उच्च स्तरीय बैठक हुई है, जिसके बाद संभावना जताई जा रही है कि सरकार जल्द निर्णय ले सकती है।किन उद्योगों पर सबसे ज्यादा असरनिर्यात क्षेत्र: इंजीनियरिंग और अन्य निर्यात क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा है और कुल निर्यात में गिरावट की आशंका जताई जा रही है।कृषि क्षेत्र: खाद और इनपुट महंगे होने से लागत बढ़ी है, वहीं निर्यात में देरी हो रही है।फूड और बेवरेज इंडस्ट्री: ऊर्जा कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ी और ऑपरेशन सीमित करने पड़े हैं।विनिर्माण और एमएसएमई : सप्लाई चेन बाधित होने से कई इकाइयां कम क्षमता पर चल रही हैं। खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के सामने ज्यादा संकट है।प्रभावित क्षेत्र को राहत देने पर सरकार का ध्यानविशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी संकट का असर लंबे समय तक रहेगा। खासतौर पर ऊर्जा कीमतों, निर्यात और महंगाई पर दिखाई देगा। सूत्रों का कहना है कि सरकार संकट से हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए लक्षित राहत पैकेज लाने का विचार कर रही है, जिसमें सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र जैसे एमएसएमई, निर्यात और एविएशन को प्राथमिकता दी जा सकती है। अभी तक सरकार ने इन क्षेत्रों की मदद के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। कुल मिलाकर, सरकार और उद्योग मिलकर इस संकट के असर को सीमित करने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन हालात पूरी तरह से सामान्य होने तक राहत उपायों की अहम भूमिका बनी रहेगी।
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