भारत के लिए खाद्य तेल और उर्वरक आयात होगा महंगा
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच संघर्ष का भारत के आयात-निर्यात पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। खाद्य तेल और उर्वरक का आयात महंगा हो सकता है। भारत का मध्य पूर्व और यूरोप के लिए कृषि उत्पादों का निर्यात भी खतरे में है। अगर युद्ध जारी रहा, तो शिपिंग कंपनियों द्वारा इमरजेंसी सरचार्ज लगाया जा सकता है।

नई दिल्ली, एजेंसी। मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष भारत के आयात और निर्यात पर गहरा असर डाल सकता है। भारतीय कारोबारी संगठनों ने चिंता जताई है कि लड़ाई लंबी चली तो भारत के लिए खाद्य तेल और उर्वरक का आयात महंगा हो सकता है। इसी तरह भारत से मध्य पूर्व और यूरोप के लिए कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर हो सकता है। सॉल्यूबल फर्टिलाइजर इंडस्ट्री एसोसिएशन (एसएफआईए) के अध्यक्ष राजीव चक्रवर्ती ने बताया कि मध्य पूर्व के लिए निर्यात अभी रुका हुआ है। युद्ध जारी रहा तो खतरा बढ़ेगा और शिपिंग कंपनियां बीमा सरचार्ज लगाना शुरू कर देंगी।
इससे आयात महंगा हो जाएगा। कहा कि अधिकतर बंदरगाह बंद होने से दिक्कत बढ़ेगी और कंटेनरों की कमी हो जाएगी। वहीं, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने बताया कि अब तक तो स्थिति सामान्य है, लेकिन अगर लड़ाई जारी रही तो सूरजमुखी के तेल की आपूर्ति में रुकावट आ सकती है। कच्चे तेल और माल ढुलाई के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं। हम हालात पर नज़र रख रहे हैं। दूसरी ओर, निर्यात की बात करें तो भारत अपने ऑयलमील (खली) निर्यात का 20 प्रतिशत मध्य पूर्व और 15 प्रतिशत यूरोप भेजता है। कारोबारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में ऑयलमील, खेती, बागवानी और फूलों की खेती से जुड़े उत्पादों का निर्यात भी खतरे में है। खरीफ की बुआई के लिए आपूर्ति की चिंता एसएफआईए अध्यक्ष राजीव चक्रवर्ती ने बताया कि जून में भारत में खरीफ बुआई का सीजन शुरू होगा। इसके लिए डीएपी और एसएसपी उर्वरक तैयार करने वाली कंपनियां हर साल फरवरी-मार्च तक जरूरी सल्फर, सल्फ्यूरिक एसिड का आयात कर लेती हैं। कतर, यूएई और ओमान से भारत को 76 प्रतिशत सल्फर आयात होता है। अभी युद्ध के कारण आपूर्ति प्रभावित है। अगर यह लंबा खिंचा तो आपूर्ति में और देरी संभव है, जिसका सीधा असर जून में बुआई के दौरान उर्वरक आपूर्ति पर भी हो सकता है। बताया कि समुद्री रास्ता बदलने से शिपमेंट में होगी देरी भारत हर साल लगभग 16 मिलियन टन खाद्य तेल का आयात करता है। इसमें सूरजमुखी के तेल की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत है जो मुख्य रूप से रूस, यूक्रेन और अर्जेंटीना से आता है। कारोबारियों का कहना है कि युद्ध के कारण अगर जहाजों को लाल सागर से दूसरी तरफ जाने के लिए मजबूर किया जाता है तो शिपमेंट में देरी हो सकती है। जहाजों से वसूला जा रहा ‘इमरजेंसी सरचार्ज’ कारोबारी संगठनों का कहना है कि शिपिंग कंपनियों ने मध्य पूर्व से गुजरने वाले जहाजों पर ‘इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज’ लगाना शुरू कर दिया है। बताया कि फ्रेंच कंटेनर कंपनी हर एक कंटेनर पर 2000 से 4000 डॉलर तक शुल्क ले रही है। इसके कारण आयातकों की लागत बढ़ने लगी है। कच्चे तेल के दाम में वृद्धि से बढ़ेगा दबाव इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) ने चेताया है कि अमेरिका-ईरान के बीच तनाव का सीधा असर भारत के कच्चे तेल और खाने के तेल के बाजारों पर पड़ेगा। एसोसिएशन ने कहा, ‘निकट भविष्य में तेल और डॉलर/ रुपये की कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। ऊर्जा की लागत, लॉजिस्टिक्स और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भी दबाव बढ़ सकता है।
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