कैंसर रोगियों के लिए सहायक हुआ है प्रो.बुशरा का शोध

Jan 07, 2026 04:44 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता भारतीय प्रौ‌द्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के जैविक विज्ञान एवं

कैंसर रोगियों के लिए सहायक हुआ है प्रो.बुशरा का शोध

नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता भारतीय प्रौ‌द्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के जैविक विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग में प्रोफेसर तथा डीबीटी-वेलकम ट्रस्ट इंडिया एलायंस की सीनियर फेलो प्रोफेसर बुशरा अतीक का शोध कैंसर रोगियों के इलाज में काफी सहायक सिद्ध हुआ है। 2025 के लिए इनके नाम की घोषणा घनश्याम दास बिड़ला पुरस्कार के लिए हुई है। प्रो. बुशरा अतीक एक अत्यंत अनुवादात्मक बायोमेडिकल अनुसंधान कार्यक्रम का नेतृत्व करती हैं, जिसका उद्देश्य कैंसर रोगियों के लिए अगली पीढ़ी के निदान और उपचारात्मक रणनीतियों का विकास करना है। प्रो.अतीक आईआईटी कानपुर की अंतरराष्ट्रीय संबंधों की डीन भी हैं, जहां वह वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियों को आगे बढ़ाते हुए विश्व की अग्रणी संस्थाओं के साथ सहयोग स्थापित करती हैं।

प्रोफेसर बुशरा के अग्रणी शोध ने विशेष रूप से प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर में उपचार की रूपरेखाओं को पुनर्परिभाषित किया है, जिससे विश्वभर के रोगियों को नई आशा मिली है। उन्होंने दिखाया कि व्यापक रूप से प्रयुक्त एंटी-एंड्रोजन दवाएं उन्नत प्रोस्टेट कैंसर में हानिकारक हो सकती हैं और केसिन किनेज 1 अवरोधकों को प्रभावी सहायक उपचार के रूप में पहचाना। उनकी टीम ने प्रोस्टेट कैंसर रोगियों के एक उपसमूह में बढ़े हुए एसपीआईएनके 1 स्तरों के पीछे की नई जैविक प्रक्रियाओं का खुलासा किया, एपिजेनेटिक दवाओं की संभावनाएं स्थापित कीं और डब्ल्यूएचओ-स्वीकृत एंटी-मलेरियल दवा आर्टेमिसिनिन को पुनः प्रयुक्त कर प्रतिरोधी कैंसर में संवेदनशीलता बहाल की। प्रो.अतीक की शैक्षणिक यात्रा बरेली, उत्तर प्रदेश से शुरू हुई जहां उन्होने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होने अलागढ़ मुस्लिम विश्ववि‌द्यालय (एएमयू) से स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। नई दिल्ला स्थित एम्स और नेशनल इस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलाजी में संक्षिप्त शोध नियुक्तियों के बाद उन्होंने मॉन्ट्रियल स्थित मैकगिल विश्ववि‌द्यालय में पोस्टडॉक्टरल अध्ययन किया और उसके बाद अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में रिसर्च इन्वीस्टगेटर के रूप में कार्य किया। वर्ष 2013 में वह आईआईटी कानपुर में सहायक प्रोफेसर के रूप में शामिल हुई। प्रो.बुशरा को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, यूनेस्को टीडब्ल्यूएएस पुरस्कार, जे.सी. बोस फेलोशिप सहित कई पुरस्कार प्राप्त हैं। वह भारत की सभी प्रमुख राष्ट्रीय विज्ञान अकादमियों को निवाचित फैलो है। इस पुरस्कार का चयन एक बोर्ड द्वारा किया जाता है जिसकी अध्यक्षता नई दिल्ली स्थित भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, (आईएनएसए) के अध्यक्ष करते हैं। आजकल इसके अध्यक्ष प्रो.आशुतोष शर्मा हैं।

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