
घरों में बिजली बचाने की तकनीक विकसित करेंगे आईआईटी दिल्ली और ईआरएलडीसी
आईआईटी दिल्ली ने ईआरएलडीसी के साथ मिलकर एक नई ऊर्जा नियंत्रण तकनीक विकसित की है। यह तकनीक बिजली की खपत को कम करने और उपभोक्ताओं को बेहतर प्रबंधन में मदद करेगी। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित यंत्र मौसम, उपयोगकर्ताओं की संख्या और समय के अनुसार बिजली उपकरणों का स्वचालित प्रबंधन करेगा।
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। आईआईटी दिल्ली ने ईस्टर्न रीजनल लोड डिस्पैच सेंटर (ईआरएलडीसी) के साथ मिलकर एक नई ऊर्जा नियंत्रण तकनीक विकसित करने की पहल शुरू की है। इस तकनीक का उद्देश्य घरों और भवनों में बिजली की खपत को घटाना और उपभोक्ताओं को बिजली का उपयोग बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद देना है। दोनों संस्थानों ने जानकारी दी कि इस परियोजना के तहत ऐसा यंत्र बनाया जाएगा जो समय अनुसार बदलने वाले बिजली शुल्क और घर में उपयोग होने वाले उपकरणों को ध्यान में रखकर स्वयं ऊर्जा का प्रबंधन करेगा। ईआरएलडीसी देश के पूर्वी राज्यों में विद्युत व्यवस्था को सुचारू रखने का कार्य करता है।

यह केंद्र लगातार बिजली आपूर्ति पर नजर रखता है और आवश्यकता के अनुसार भार नियंत्रण तथा राज्य स्तर के केंद्रों से समन्वय करता है। इस सहयोग का उद्देश्य ऐसी तकनीक तैयार करना है जो बिजली खपत को नियंत्रित कर उपभोक्ताओं को बचत करने में सहायता करे और साथ ही विद्युत तंत्र की स्थिरता भी बढ़ाए। आईआईटी दिल्ली के अनुसार यह नया यंत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित होगा। इसमें छोटे सेंसर और बिजली के उपकरणों से जुड़ने वाले विशेष प्लग सहित अन्य का प्रयोग किया जाएगा। यह प्रणाली मौसम, घर में उपस्थित लोगों की संख्या, समय आधारित शुल्क और उपयोगकर्ता की पसंद जैसी सूचनाओं को ध्यान में रखकर स्वयं निर्णय लेगी कि कब कौन सा उपकरण चलाना है और कब बंद रखना है। आईआईटी दिल्ली के कॉरपोरेट संबंध डीन प्रीति रंजन पांडा ने कहा कि यह तकनीक भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार बढ़ती बिजली मांग के बीच उपभोक्ताओं के लिए ऐसे समाधान जरूरी हैं जो उन्हें ऊर्जा के जिम्मेदार उपयोग की ओर प्रेरित करें।

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