
आईसीएआई ने वैश्विक नेटवर्किंग और विज्ञापन दिशानिर्देशों में बड़े बदलाव पर लगाई मुहर
- यूडिन प्रणाली से 70 से 80 हजार करोड़ रुपये की संभावित धोखाधड़ी रोकी गई
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की शीर्ष संस्था द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट (आईसीएआई) ने अपने वैश्विक नेटवर्किंग दिशानिर्देश और विज्ञापन नियमों में बड़े सुधारों को मंजूरी दे दी है। आईसीएआई अध्यक्ष चरणजोत सिंह नंदा ने गुरुवार को आयोजित एक प्रेसवार्ता में बताया कि ये दिशानिर्देश लंबे समय से लंबित थे। अब इससे देश में बड़े घरेलू अकाउंटिंग नेटवर्क बनाने में मदद मिलेगी। संस्थान के अध्यक्ष सीए चरणजोत सिंह नंदा ने कहा कि इन बदलावों के तहत आईसीएआई (ग्लोबल नेटवर्किंग) गाइडलाइंस 2025 तथा संशोधित आचार संहिता ( कोड ऑफ एथिक्स) को मंजूरी मिली है। जिससे भारतीय सीए फर्मों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने का मार्ग खुल जाएगा।

ये सभी प्रस्ताव 10–11 दिसंबर को दिल्ली में हुई केंद्रीय परिषद की बैठक में पारित हुए। उन्होंने बताया कि नई गाइडलाइंस का उद्देश्य भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों और घरेलू नेटवर्क्स को अंतरराष्ट्रीय सहयोग, साझेदारी और संबद्धता के लिए पारदर्शी और कानूनी ढांचा प्रदान करना है। इसके तहत भारतीय फर्म विदेशी संस्थाओं को भी औपचारिक रूप से अपने नेटवर्क से जोड़ सकेंगी। नंदा ने कहा कि यह ढांचा छोटे और मध्यम फर्मों को भी वैश्विक स्तर पर सार्थक भागीदारी का मौका देगा। आईसीएआई के अनुसार यह मॉडल भारतीय फर्मों को साझा ज्ञान, विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण, तकनीकी सहायता और वैश्विक प्रतिष्ठा के फायदों से जोड़ने में सक्षम बनाएगा। विज्ञापन नियमों में ढील संशोधित आचार संहिता में विज्ञापन और वेबसाइट संबंधी प्रावधानों को आधुनिक आवश्यकता के अनुरूप लचीला बनाया गया है। अब फर्में सीमित रूप से विज्ञापन, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रेजेंटेशन और विस्तृत वेबसाइट जानकारी प्रदान कर सकेंगी। नई आचार संहिता 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। सेवाओं का दायरा बढ़ा संस्थान ने ‘मैनेजमेंट कंसल्टेंसी एंड अदर सर्विसेज’ की परिभाषा का विस्तार करते हुए फोरेंसिक अकाउंटिंग, रिसर्च एनालिसिस, सोशल इंपैक्ट असेसमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी सेवाओं को भी शामिल किया है। साथ ही नॉन-अशोरेंस सर्विसेज (एनएएस) और स्वतंत्रता मानकों को और कठोर बनाया गया है। नियमों में यह भी जोड़ा गया है कि जहां किसी इकाई को पहले गैर-आश्वासन सेवा दी गई हो, वहां उसके बाद उसी इकाई का ऑडिट नहीं लिया जा सकेगा। यूडिन प्रणाली से 70 से 80 हजार करोड़ रुपये की संभावित धोखाधड़ी रोकी गई भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान आईसीएआई के अध्यक्ष चरणजोत सिंह नंदा ने बताया है कि यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी यूडिन प्रणाली के कारण अब तक 70 हजार से 80 हजार करोड़ रुपये की संभावित वित्तीय धोखाधड़ी रोकी जा चुकी है। यूडिन उस हर दस्तावेज के लिए जारी किया जाता है जिसे किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा प्रमाणित किया जाता है। इसे आईसीएआई ने 2019 में शुरू किया था। नंदा ने बताया कि इसके लागू होने के बाद से अब तक 10 करोड़ से अधिक यूडिन जारी किए जा चुके हैं और यह प्रणाली दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत बनाती है। आईसीएआई का कहना है कि यूडिन ने न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ाई है, बल्कि वित्तीय लेनदेन में संभावित गड़बड़ियों को समय रहते पकड़ने में भी अहम भूमिका निभाई है। संस्थान अब टैक्स ऑडिट के मामलों में यूडिन जारी करने पर सीमा निर्धारित करने की योजना पर भी काम कर रहा है, ताकि इसका उपयोग और अधिक व्यवस्थित व प्रभावी बनाया जा सके।

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