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एचआईवी पीड़ितों को 3000 पेंशन देने पर विचार कर रही है केजरीवाल सरकार

केजरीवाल सरकार राजधानी में एड्स जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित लोगों को 3000 रुपये पेंशन देने पर विचार कर रही है। सरकार ने बुधवार को हाईकोर्ट में यह जानकारी दी। एचआईवी पीड़ित लोगों को फिलहाल 1000 रुपये पेंशन दिया जाने का प्रावधान है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरि. शंकर की पीठ के समक्ष सरकार की ओर से अधिवक्ता राहुल मेहरा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही इस बारे में औपचारिक रिपोर्ट पेश की जाएगी। हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार को अब 2 मई तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने इस बीमारी से पीड़ित लोगों को न्यूततम मजदूरी के बराबर पेंशन देने के बारे में समुचित निर्णय नहीं लेने पर हाईकोर्ट ने 9 जनवरी, 2018 को सरकार को आड़े हाथ लिया था। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा था कि जिन लोगों के पास रहने के लिए घर है उन्हें आप (सरकार) निशुल्क पानी-बिजली दे रहे हैं लेकिन जानलेवा बीमारी से पीड़ित लोगों को मासिक पेंशन देने के लिए आपके पास पैसे नहीं है।

अधिवक्ता अजय वर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि दिल्ली में एड्स पीड़ितों को मात्र एक हजार रुपये मासिक पेंशन दिया जाता है जो 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भी नहीं है। उन्होंने कहा कि केरल, गुजरात सहित कई राज्यों में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को सस्ते दरों पर राशन, निशुल्क, परिवहन व अन्य सुविधा दी जाती है। हालांकि दिल्ली सरकार की ओर से अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि एड्स से पीड़ित लोगों के पेंशन बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने एड्स से पीड़ित एक मरीज के पत्र को जनहित याचिका में तब्दील करते हुए इस पर सुनवाई कर रही है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल को लिखे इस पत्र में एड्स पीड़ित ने कहा है कि सरकार से उसे हर माह एक हजार रुपये पेंशन मिलता है और यह बहुत कम है। पत्र में उस व्यक्ति ने इसे बढ़ाकर कम से कम तीन हजार रुपये पेंशन देने की मांग की है।

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