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केजरीवाल सरकार ने केंद्र से चेन झपटमारी पर लगाम के लिए कानून में बदलाव की मांग की

राजधानी में तेजी से बढ़ती चेन झपटमारी की वारदातों पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर ऐसे अपराध के लिए सजा को और सख्त बनाने की मांग की है। सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार में एक जनहित याचिका के जवाब में यह जानकारी दी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने सरकार का पक्ष जानने के बाद गृह मंत्रालय से इस पर सकारात्मक निर्णय लेने और अगली सुनवाई से पहले स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सरकार की ओर से अधिवक्ता गौतम नारायाण ने पीठ को बताया कि हरियाणा और पंजाब सरकार ने कानून में संशोधन कर झपटमारी को अपराध की अलग श्रेणी में रखा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने भी इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर कानून में बदलाव कर झपटमारी को अपराध की अलग श्रेणी में रखने और सख्त सजा का प्रावधान करने की मांग की है। मगर, मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।

उन्होंने एक अधिवक्ता की ओर से दाखिल जनहित याचिका के जवाब में पीठ को यह जानकारी दी। याचिका में कहा गया है कि राजधानी में चेन झपटमारी की वारदातों में छह गुना की बढ़ोतरी हो गई है। इससे दिल्लीवालों को ही नहीं बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों के दिमाग में भी डर बैठ गया है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान चेन झपटमारी की बढ़ती घटना पर चिंता जताते हुए मामले की अगली सुनवाई 1 अगस्त तय की है।

इससे पहले याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया कि पुलिस झपटमारी की वारदातों को जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज करती है उनमें महज तीन साल कैद की सजा का प्रावधान है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता मांग कि कि पुलिस को झपटमारी की वारदात को भारतीय दंड संहिता की धारा 390 (लूटपाट/डकैती) के तहत दर्ज करना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में आमतौर पर प्रतिदिन झपटमारी के 25 वारदातें होती हैं।

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  • Web Title:high court