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कल्ब में छोटी रकम से ताश खेलना जुआ नहीं-

हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी कल्ब में छोटी रकम दांव लगाकर ताश (रमी) खेलना जुआ नहीं है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर सहमति जताते हुए टिप्पणी की है।

जस्टिस वाल्मीकि जे. मेहता ने यह टिप्पणी सुरेश कुमार द्वारा दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए की है। सुरेश कुमार ने निचली अदालत के एक आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें एक झूठी पुलिस शिकायत दाखिल करने की क्षतिपूर्ति के तौर पर केंद्रीय सचिवालय कल्ब को तीन लाख रुपये भुगतान करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने कहा है कि ‘मेरे विचार से निचली अदालत का फैसला सही है क्योंकि किसी क्लब के परिसर में कुछ आने से लेकर कुछ रुपये तक के दांव के साथ रमी का ताश का खेल खेला जाता है, इससे यह जुआ नहीं बन जाता। क्लब के पूर्व कर्मचारी सुरेश कुमार ने पुलिस में शिकायत की थी कि कल्ब में माफिया काम करता है और क्लब ने अपने परिसर में जुआ खेलने की अनुमति दे दी है।

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  • Web Title:high court
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