
चांद से 166 करोड़ रुपये किलो के कीमती तत्व निकालने की तैयारी
संक्षेप: - हेलियम-3 नामक यह तत्व चांद का ईंधन कहलाता है न्यूयॉर्क, एजेंसी। चांद से
- हेलियम-3 नामक यह तत्व चांद का ईंधन कहलाता है न्यूयॉर्क, एजेंसी। चांद से 166 करोड़ रुपये किलो के कीमती तत्व निकालने की तैयारी शुरू हो गई है। हेलियम-3 नामक यह तत्व चांद का ईंधन कहलाता है। एक अमेरिकी कंपनी यक काम कर रही है। इस तत्व से भविष्य में साफ और अनंत ऊर्जा बनाई जा सकती है। हेलियम-3 एक दुर्लभ गैस है जो सूरज की हवा से चांद की मिट्टी में अरबों सालों में जमा हुई। पृथ्वी पर यह नहीं मिलती क्योंकि हमारी वायुमंडल और चुंबकीय परत इसे रोक देती है। अगर इस गैस का उपयोग न्यूक्लियर फ्यूजन में किया जाए तो यह सूरज जैसी स्वच्छ ऊर्जा बना सकती है।

इसमें कोई रेडिएशन और परमाणु कचरा नहीं होगा। बस कुछ टन हेलियम-3 ही पूरे देशों को कई सालों तक ऊर्जा दे सकता है। कैसे निकाला जाएगा यह ईंधन : यह बहुत कम मात्रा में मिट्टी में मौजूद है। यानी हजारों टन धूल खोदनी होगी ताकि थोड़ा सा हेलियम-3 निकले। इसके लिए रोबोटिक मशीनें बनाई जा रही है जो चांद की सर्द रातें, तेज रोशनी और कम गुरुत्वाकर्षण झेल सकें। ये मशीनें बिना इंसान के खुद काम करेंगी। पहली टेस्ट मिशन 2027 में प्रोसपेक्ट मून नाम से किया जाएगा। तकनीकी चुनौतियां : चांद पर कोई हवा नहीं होती इसलिए सामान्य इंजन काम नहीं करते। धूल बहुत धारदार होती है, मशीनों को नुकसान पहुंचा सकती है। फिर हेलियम-3 को सुरक्षित कंटेनरों में भरकर पृथ्वी पर लाना भी एक बड़ी चुनौती है। कई देश दौड़ में भी : इंटरलुएन अकेली कंपनी नहीं है। कई देश और कंपनियां भी दौड़ में लगी हुई हैं। चीन, भारत, अमेरिका, रूस सभी चांद के संसाधनों पर नजर रखे हुए हैं। अब अंतरिक्ष सिर्फ खोज का क्षेत्र नहीं रहा बल्कि यह “नई अर्थव्यवस्था की सीमा बन रहा है। जो देश सबसे पहले इस तत्व को निकालेगा, वही भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था में अग्रणी बन सकता है। ये होंगे फायदे : इसकी मदद से पृथ्वी को फॉसिल फ्यूल से छुटकारा मिल सकता है। - कार्बन उत्सर्जन घटेगा और ऊर्जा सस्ती, स्वच्छ और असीमित बन सकती है।

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