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संशोधित--- 1000 स्टैंडर्ड फ्लोर बसें खरीदने पर रोक जारी रहेगी

हाईकोर्ट ने सोमवार को डीटीसी ने 1000 स्टैंडर्ड फ्लोर बसें खरीदने के अपने फैसले को जायज ठहरया है। हालांकि डीटीसी ने यह भी स्वीकार किया कि लो-फ्लोर बसें यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और सहूलियत है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरि. शंकर की पीठ के समक्ष डीटीसी ने कहा कि वह दिव्यांगों की सुविधाओं को लेकर संवेदनशील है। डीटसी के वकील ने कहा कि स्टेंडर्ड फ्लोर बसों में दिव्यांगों के लिए व्हील चेयर सहित सभी तरह की सुविधाएं होगी। इसके बाद पीठ ने मामले की सुनवाई 14 मई तक स्थगित कर दी। साथ ही उस आदेश को भी प्रभावी रखा जिसके तहत स्टैंडर्ड फ्लोर की बसें खरीदने पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को 1000 स्टैंडर्ड फ्लोर बसों की खरीद के लिए सरकार की ओर से जारी प्रस्ताव अनुरोध (आरएफपी) को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। पिछली सुनवाई पर पीठ ने कहा था कि स्टैंडर्ड फ्लोर की बसें ना तो दिव्यांगों के अनुकूल है और ना ही बुजुर्ग व बच्चें इसमें आसानी से सवार हो सकते। इसके साथ ही पीठ ने 1000 इलेक्ट्रिक लो फ्लोर बसें खरीदने के लिए सरकार की ओर से परिवहन विभाग द्वारा तय की गई समय सीमा को भी खारिज कर दिया था। इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए निविदा जून, 2018 में जारी होने की संभावना है और बसों की आपूर्ति अगले साल 31 मार्च के बाद हो पाएगी। हाईकोर्ट ने यह आदेश सामाजिक कार्यकर्ता निपुण मल्होत्रा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है। याचिका में उन्होंने 300 करोड़ रुपये की लागत से राजधानी में 2000 स्टैंडर्ड फ्लोर बसों की खरीद के पिछले साल दिल्ली सरकार के फैसले को चुनौती दी है। मल्होत्रा ने पीठ को बताया कि डीटीसी के ही आंकड़े के मुताबिक लो फ्लोर बसें स्टैंडर्ड फ्लोर बसों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जय देहाद्रई द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि लो फ्लोर बसें अधिक उपयोगी है।

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