
बदलाव: हरियाणा में देश की पहली हाईड्रोजन ट्रेन दौड़ने को तैयार
फ्लैग: जिंद और सोनीपत के बीच ट्रेन चलाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची
चंडीगढ़, एजेंसी। हरियाणा में देश की पहली हाईड्रोजन ईंधन से लैस ट्रेन दौड़ने को तैयार है। राज्य सरकार ने मंगलवार को बयान जारी कर ये जानकारी दी। बयान के अनुसार उत्तरी रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजना अंतिम चरण में है। ये ट्रेन जिंद और सोनीपत के बीच चलेगी जो कुल 89 किलोमीटर का रूट होगा। हाईड्रोजन ट्रेन को सुचारू ढंग से ऊर्जा मुहैया कराने के लिए 11 किलोवाट का हाईड्रोजन प्लांट जिंद में स्थापित किय गया है। इसी से ट्रेन को निर्बाध ऊर्जा उपलब्ध कराई जाएगी। इस परियोजना के लिए जिस हाईड्रोजन प्लांट को स्थापित किया गया है उसकी ऊर्जा भंडारण क्षमता तीन हजार किलोग्राम है।
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने परियोजना को लेकर दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (डीएचबीवीएन) के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को जरूरी दिशा- निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट कहा कि वे नियमित तरीके से परियोजना से जुड़ी ऊर्जा आपूर्ति का मूल्यांकन करें जिससे आने वाले समय में किसी तरह की कोई समस्या न हो। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर भी ध्यान देने को कहा है। आठ कोच से सफर होगा सुगम योजना के अनुसार पहले चरण में ट्रेन को दस कोच के साथ चलाया जाएगा। इसमें एक साथ कुल दो हजार यात्री सफर कर सकेंगे। ट्रेन दिनभर में एक तरफ से दो चक्कर लगाएगी और कुल करीब 360 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। हाईड्रोजन अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ होता है। इसको देखते हुए कई स्तर पर सुरक्षा की तैयारियां की गई हैं जिससे किसी घटना को होने से रोका जा सके। हाईड्रोजन लीक की आपात स्थिति से निपटने के लिए कंप्यूटेशनल फ्लूड डायनेमिक्स शोध भी कराया गया है। स्वच्छ ऊर्जा सफर का साथी रेल मंत्री अश्चिनी वैष्णव ने पिछले माह लोकसभा में बताया था कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत देश की पहली हाईड्रोजन ट्रेन दौड़ाने का काम तेजी से चल रहा। उन्होंने बताया था कि इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के तहत ग्रीन हाईड्रोजन ईंधन को तैयार किया जाएगा। इसके तहत सौर और हवा के जरिए पानी से स्वच्छ हाईड्रोजन को अलग किया जाता है। इससे भविष्य में हरित ऊर्जा से ट्रेन संचालन को नया रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया था कि आरडीएसओ के मानकों के तहत परियोजना का काम जारी है। रेट्रोफिट में गए दो डीजल इंजन हाईड्रोजन ट्रेन चलाने के लिए दो डीजल इंजन को रेट्रोफिट के लिए भेजा गया है। इस प्रक्रिया के तहत दोनों इंजन में हाईड्रोजन फ्यूल प्रणाली लगेगी। इंजन में विशेष तरह के लगे सिलेंडर में 220 किलोग्राम हाईड्रोजन भरी जा सकती है जिसका प्रेशर 350 होगा। रेलवे ने देश के अलग-अलग हिस्सों में वर्ष 2030 तक कुल 35 हाईड्रोजन ट्रेन चलाने का लक्ष्य रखा है। एक ट्रेन को तैयार करने में औसतन 80 करोड़ रुपये लगेंगे और ट्रेन दौड़ाने के लिए एक रूट पर ढांचा तैयार करने का खर्च करीब 70 करोड़ रुपये होगा। लद्दाख में पहले दौड़ रही हैं बसें परिवहन क्षेत्र को हरित ऊर्जा से लैस करने के लिए देश में तेजी से काम जारी है। जून 2025 में एनटीपीसी ने लद्दाख के लेह जिले में पांच हाईड्रोजन बसों को हरी झंडी दिखाई थी। देश के दुर्गम क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की कड़ी में ये बड़ी उपलब्धि थी। इसी कड़ी में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 30 मार्च 2022 को हाईड्रोजन ईंधन से लैस कार से संसद भवन पहुंचे थे। केंद्र सरकार नेशनल ग्रीन हाईड्रोजन मिशन के तहत देशभर में वर्ष 2030 तक एक हजार से अधिक हाईड्रोजन बसें चलाने की तैयारी में है।

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