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जीएसटी संग्रह में 0.7 प्रतिशत की मामूली वृद्धि

जीएसटी संग्रह में 0.7 प्रतिशत की मामूली वृद्धि

संक्षेप:

नई दिल्ली में जीएसटी संग्रह नवंबर में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.70 लाख करोड़ रुपये रहा। हालांकि, घरेलू राजस्व में गिरावट के कारण यह पिछले महीनों की तुलना में कम है। जीएसटी दर में कटौती के सकारात्मक प्रभाव से बड़े राज्यों में संग्रह बढ़ा है, जबकि रिजर्व बैंक का मानना है कि यह अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।

Mon, 1 Dec 2025 07:44 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, एजेंसी। जीएसटी संग्रह नवंबर में 0.7 प्रतिशत की मामूली वृद्धि के साथ 1.70 लाख करोड़ रुपये रहा है। घरेलू राजस्व में गिरावट के कारण जीएसटी संग्रह कम हुआ है। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में नवंबर महीने में जीएसटी की दरों में कटौती का सकारात्मक असर देखने को मिला है। सोमवार को नवंबर में नवंबर 2024 में यह संग्रह 1.69 लाख करोड़ रुपये था। इस साल के बीते कुछ महीनों को देखें तो बीते अक्तूबर में जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी की दर घट रही है। इस साल सितंबर में जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोतरी की दर पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 9.1% रही थी।

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यह अक्तूबर महीने में 4.6% हो गई। वहीं, यह नवंबर महीने में घट कर 0.7% रह गई। जीएसटी दर में कटौती के बाद नवंबर महीने में संग्रह भले ही साल-दर-साल के हिसाब से बढ़ा है लेकिन, बीते महीनों की तुलना में इसमें गिरावट आई है। अक्तूबर में कुल जीएसटी संग्रह सितंबर के 1.89 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.96 लाख करोड़ रुपये हो गया था। वहीं, मई 2025 में संग्रह ने दो लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया था। इस महीने बीतों महीनों की तुलना में यह आंकड़ा कम हुआ है। नवंबर महीने में बीते साल के मुकाबले देश के बड़े राज्यों का भी संग्रह भी बढ़ा है। हरियाणा का संग्रह 17 प्रतिशत, केरल का आठ प्रतिशत और असम का कलेक्शन 18 प्रतिशत बढ़ा है। इसके अलावा गुजरात और तमिलनाडु का संग्रह एक और दो प्रतिशत बढ़ा है। साथ ही राजस्थान में छह फीसदी की बढ़त देखी गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, का मानना है कि जीएसटी में की गई कटौती आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी। यह अमेरिका की तरफ से लगाए गए टैरिफ के असर को भी कम करने में मदद करेगी। बचत उत्सव ने खरीदारी को प्रोत्साहित किया देश में उपभोग गतिविधियों में मजबूती के संकेत देते हुए सितंबर-अक्तूबर 2025 के दौरान जीएसटी के तहत सभी आपूर्तियों का करयोग्य मूल्य 15 प्रतिशत बढ़ गया है। यह वृद्धि पिछले वर्ष की इसी अवधि में दर्ज 8.6 प्रतिशत की तुलना में लगभग दोगुनी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह उछाल मुख्य रूप से 22 सितंबर से लागू हुई जीएसटी दर कटौती के बाद विभिन्न क्षेत्रों में उपभोग में आए तेज इजाफे का परिणाम है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ‘बचत उत्सव’ के दौरान कम दरों ने उपभोक्ताओं को अधिक खरीदारी के लिए प्रोत्साहित किया, जबकि उद्योग ने भी जीएसटी बचत का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाकर अनुपालन में बेहतरी दिखाई। इससे आपूर्ति पक्ष पर कोई दबाव नहीं पड़ा और बाजार गतिविधियां सुचारु रहीं।