ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News NCR नई दिल्लीवाराणसी के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार को हरी झंडी

वाराणसी के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार को हरी झंडी

लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी की मौजूदा क्षमता का विस्तार किया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय...

वाराणसी के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार को हरी झंडी
हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीWed, 19 Jun 2024 10:00 PM
ऐप पर पढ़ें

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, वाराणसी की मौजूदा क्षमता का विस्तार किया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की हुई बैठक में इस बाबत फैसला लिया गया।
भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) ने वाराणसी हवाईअड्डे पर नई टर्मिनल बिल्डिंग, रनवे एक्सटेंशन, समानांतर टैक्सी ट्रैक और अन्य निर्माण का प्रस्ताव दिया था, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूर कर लिया। हवाई अड्डे की यात्री प्रबंधन क्षमता को मौजूदा 3.9 मिलियन यात्री प्रति वर्ष (एमपीपीए) से बढ़ाकर 9.9 एमपीपीए किया जाएगा। इसके लिए 2869.65 करोड़ रुपये अनुमानित वित्तीय व्यय को मंजूर किया गया है। नई टर्मिनल बिल्डिंग 75,000 वर्गमीटर के क्षेत्र को कवर करेगी। इसमें छह एमपीपीए की क्षमता और 5000 पीक आवर यात्रियों (पीएचपी) को संभालने के लिहाज से डिजाइन किया गया है। इसे शहर की विशाल सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करने के लिहाज से भी डिजाइन किया गया है।

हरित हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया जाएगा

प्रस्ताव में रनवे को 4075 मीटरx45 मीटर तक विस्तारित करना और 20 विमानों को खड़ा करने के लिए एक नए एप्रन का निर्माण करना शामिल है। वाराणसी हवाई अड्डे को हरित हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसका प्राथमिक उद्देश्य ऊर्जा अनुकूलन, अपशिष्ट पुनर्चक्रण, कार्बन पदचिह्न में कमी, सौर ऊर्जा उपयोग और प्राकृतिक दिन के उजाले के समावेश के साथ-साथ योजना, विकास और परिचालन के दौरान अन्य स्थायी उपायों के माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

-----

गुजरात और तमिलनाडु में एक गीगावाट की पवन ऊर्जा

केंद्र सरकार ने गुजरात और तमिलनाडु में 1,000 मेगावाट (एक गीगावाट) क्षमता की अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं को मंजूरी दी। दोनों राज्यों में 500-500 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना पर कुल 7,453 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना के तहत गुजरात और तमिलनाडु में एक गीगावाट की अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना की जाएगी। इसमें कमीशनिंग के लिए 6,853 करोड़ रुपये और अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए रसद आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दो बंदरगाहों के उन्नयन के लिए 600 करोड़ रुपये का अनुदान शामिल है। वैष्णव ने कहा कि व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) योजना 2015 में अधिसूचित राष्ट्रीय अपतटीय पवन ऊर्जा नीति के कार्यान्वयन की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र में मौजूद विशाल अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता का प्रयोग करना है। उन्होंने कहा कि सरकार से वीजीएफ समर्थन अपतटीय पवन परियोजनाओं से बिजली की लागत कम होगी और उन्हें डिस्कॉम द्वारा खरीद के लिए व्यवहार्य बनाएगा।

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।