अदालतों में सभी वर्गों का प्रतिधित्व सुनिश्चित हो : मेघवाल

अदालतों में सभी वर्गों का प्रतिधित्व सुनिश्चित हो : मेघवाल

संक्षेप:

केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालयों से जजों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता का ध्यान रखने को कहा है। कानून मंत्री ने बताया कि 2018 से 2025 के बीच 841 जजों की नियुक्ति हुई, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व नहीं है। सरकार न्यायपालिका में सामाजिक विविधता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Dec 10, 2025 08:58 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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उच्च न्यायपालिका में आरक्षण की मांग और कोलेजियम पर उठते सवालों के बीच केंद्र सरकार ने देश के सभी उच्च न्यायालयों से जज की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करते समय सामाजिक विविधता का ध्यान रखने को कहा है ताकि सभी वर्गों के लोगों का समुचित प्रतिनिधित्व शामिल हो सके। सरकार ने उच्च न्यायालयों में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अन्य का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं होने के मद्देनजर उच्च न्यायालयों से यह आग्रह किया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक देश के सभी उच्च न्यायालयों में 2018 से नवंबर, 2025 तक 841 जज की नियुक्ति हुई।

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इनमें से एससी समुदाय से 32, एसटी से 17, ओबीसी 103, अल्पसंख्यक 46 जजों की नियुक्ति हुई है। कानून मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद-124, 217 और 224 के तहत की जाती है, जिसमें किसी भी जाति या वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज में किसी भी जाति या वर्ग के लोगों के प्रतिनिधित्व से जुड़ा कैटेगरी-वाइज डेटा सेंट्रली उपलब्ध नहीं है। हालांकि कानून मंत्रालय ने कहा कि 2018 से, देश के सभी उच्च न्यायालयों में जजों के पद के लिए सिफारिश किए गए नामों को तय प्रारूप (सुप्रीम कोर्ट के साथ सलाह करके तैयार) में अपने सामाजिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देनी होती हैं। सरकार सामाजिक विविधता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध मंत्रालय ने कहा कि इसी अवधि में, अलग-अलग हाईकोर्ट में 129 महिलाओं को जज के तौर पर नियुक्ति हुई है। संसद को बताया गया कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव शुरू करने की जिम्मेदारी भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की है, जबकि हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव शुरू करने की जिम्मेदारी संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की। कानून मंत्री मेघवाल ने अपने लिखित जवाब में सदन को बताया कि हालांकि, सरकार न्यायपालिका में सामाजिक विविधता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, इसलिए सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से आग्रह कर रही है कि जज की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजते समय अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अल्पसंख्यक, महिलाओं से जुड़े आवेदकों पर पूरा ध्यान दिया जाए। ताकि उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता सुनिश्चित हो सके।