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मसालों की गुणवत्ता सुधार को सरकार ने उठाए कदम

भारत से निर्यात होने वाले मसालों में ईटीओ संदूषण रोकने के लिए कई कदम उठाए

मसालों की गुणवत्ता सुधार को सरकार ने उठाए कदम
हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीWed, 15 May 2024 09:00 PM
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भारत से निर्यात होने वाले मसालों में ईटीओ संदूषण रोकने के लिए कई कदम उठाए गए : वाणिज्य मंत्रालय
सिंगापुर, हांगकांग में प्रतिबंधित मसाले भारत के मसाला निर्यात के एक प्रतिशत से भी कम

अलग-अलग देशों में 0.73 फीसदी से लेकर 7 फीसदी तक एथिलीन ऑक्साइड के इस्तेमाल की इजाजत

नई दिल्ली, एजेंसी। भारत ने निर्यात होने वाले मसालों में कैंसरकारी रसायन ईटीओ (एथिलीन ऑक्साइड) के संदूषण को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। बोर्ड ने इन दोनों देशों को भेजी जाने वाली ऐसी निर्यात खेपों का परीक्षण करना अनिवार्य कर दिया है। वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने बुधवार को यह बात कही।

भारतीय ब्रांड एमडीएच और एवरेस्ट के कुछ मसालों में ईटीओ अवशेषों की मौजूदगी के कारण सिंगापुर और हांगकांग में दो भारतीय मसाला ब्रांड के उत्पादों को वापस मंगाने की रिपोर्ट मिलने के बाद ये कदम उठाए गए। अलग-अलग देशों में 0.73 फीसदी से लेकर 7 फीसदी तक ईटीओ के इस्तेमाल की इजाजत है। साथ ही इन देशों में प्रतिबंधित मसाले भारत के कुल मसाला निर्यात के एक प्रतिशत से भी कम हैं।

अतिरिक्त सचिव भाटिया ने कहा, मसाला बोर्ड ने इन क्षेत्रों में भारतीय मसाला निर्यात की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं। बोर्ड ने इन दोनों देशों को भेजी जाने वाली ऐसी निर्यात खेपों का परीक्षण करना अनिवार्य कर दिया है। एक तकनीकी-वैज्ञानिक समिति ने मूल कारण विश्लेषण भी किया है। साथ ही प्रसंस्करण सुविधाओं का निरीक्षण किया है और मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए नमूने एकत्र किए हैं।

भारत ने दिया ईटीओ परीक्षण का प्रस्ताव :

उन्होंने कहा, समिति की सिफारिशों के जवाब में सात मई, 2024 से सिंगापुर और हांगकांग के लिए सभी मसाला खेप के लिए ईटीओ अवशेषों के अनिवार्य नमूनाकरण और परीक्षण को लागू किया गया है। सभी निर्यातकों के लिए ईटीओ उपचार के दिशानिर्देश भी दोहराए गए हैं। भारत ने ईटीओ के उपयोग की सीमा तय करने के लिए कोडेक्स समिति के समक्ष भी मामला उठाया है, क्योंकि विभिन्न देशों की सीमाएं अलग-अलग हैं। इसके अलावा, ईटीओ परीक्षण के लिए कोई मानक नहीं है। भारत ने इसके लिए प्रस्ताव दिया है।

मसाला बोर्ड ने जारी किए दिशा-निर्देश :

मसालों और पाक जड़ी-बूटियों के लिए विश्वव्यापी मानकों को विकसित और विस्तारित करने और मानक विकास प्रक्रिया में अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ परामर्श करने के लिए, सीसीएससीएच (मसालों और पाक जड़ी-बूटियों पर कोडेक्स समिति) का गठन वर्ष 2013 में 100 से अधिक देशों के समर्थन से किया गया था। खाद्य उत्पादों में कुछ हद तक नमूनों की विफलता होती रहती है और भारत में नमूना विफलता एक प्रतिशत से भी कम है। इन वस्तुओं पर कुछ देशों द्वारा गुणवत्ता संबंधी चिंताएं जताए जाने के बीच मसाला बोर्ड ने भारत से भेजे जाने वाले उत्पादों में एथिलीन ऑक्साइड संदूषण को रोकने के लिए निर्यातकों के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं।

पिछले साल 4.25 अरब डॉलर का निर्यात :

वर्ष 2023-24 में, भारत का मसाला निर्यात कुल 4.25 अरब डॉलर का था, जो वैश्विक मसाला निर्यात का 12 प्रतिशत है। भारत से निर्यात किए जाने वाले प्रमुख मसालों में मिर्च पाउडर शामिल है, जो 1.3 अरब डॉलर के निर्यात के साथ सूची में सबसे ऊपर है। इसके बाद जीरा 55 करोड़ डॉलर, हल्दी 22 करोड़ डॉलर, इलायची 13 करोड़ डॉलर, मिश्रित मसाले 11 करोड़ डॉलर आदि शामिल हैं। अन्य उल्लेखनीय निर्यात होने वाले मसालेां में हींग, केसर, सौंफ, जायफल, जावित्री, लौंग और दालचीनी हैं।

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