Hindi NewsNcr NewsDelhi NewsGovernment Tightens AI Content Regulations Mandatory Labels and 3-Hour Removal for Deepfake Videos
ब्यूरो::::एआई से तैयार डीपफेक सामग्री पर सरकार सख्त

ब्यूरो::::एआई से तैयार डीपफेक सामग्री पर सरकार सख्त

संक्षेप:

हेडिंग विकल्प:: एआई कंटेंट पर सख्ती, तीन घंटे में हटाना होगा डीपफेक वीडियो -

Feb 10, 2026 08:44 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

हेडिंग विकल्प:: एआई कंटेंट पर सख्ती, तीन घंटे में हटाना होगा डीपफेक वीडियो - सरकार ने एआई से बने कंटेंट पर लेबल लगाना अनिवार्य किया - एक्स और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मंचों को सक्षम अधिकारी के निर्देश पर तीन घंटे पर हटानी होगी सामग्री नई दिल्ली, विशेष संवाददाता केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और एक्स जैसी कंपनियों के लिए नियम सख्त कर दिए हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा तैयार की गई हर फोटो, वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा अगर इन प्लेटफॉर्म्स पर कोई गलत, गैर-कानूनी वीडियो या फोटो डाली जाती है, तो कंपनियों को उसे सूचना मिलने के सिर्फ तीन घंटे के भीतर हटाना होगा।

केंद्र सरकार ने मंगलवार को डीपफेक और एआई के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए यह अहम कदम उठाया है। सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन कर लेबल लगाना अनिवार्य किया है। साथ ही कहा है कि सोशल मंचों को किसी सक्षम अधिकारी या अदालतों के निर्देश पर ऐसी किसी भी सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाना होगा। सभी प्लेटफॉर्मों के लिए नियम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि जो भी प्लेटफॉर्म एआई से कंटेंट बनाने या प्रसारित करने की सुविधा देते हैं, उन्हें ऐसे कंटेंट पर साफ और स्पष्ट लेबल लगाना होगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि वह सामग्री कृत्रिम रूप (एआई) से बनाई गई है। जहां तकनीकी रूप से संभव होगा, वहां प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट में स्थाई मेटाडाटा या पहचान चिन्ह भी जोड़नी होगी, जिससे उसके स्रोत का पता लगाया जा सके। 20 फरवरी से लागू होंगे नए नियम नए नियमों में ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-विजुअल जानकारी और सिंथेटिक कंटेंट की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। इसमें वह सामग्री शामिल होगी, जो कंप्यूटर या एआई की मदद से इस तरह बनाई या बदली गई हो कि वह असली व्यक्ति या घटना जैसी लगे। सरकार का कहना है कि सिंथेटिक कंटेंट वह होता है, जो कृत्रिम तरीके से बनाया या बदला गया हो लेकिन देखकर लोग उसे असली समझ लें। नए संशोधनों का उद्देश्य डीपफेक और एआई से फैलने वाली गलत जानकारियों के खतरे को कम करना है। साथ ही तकनीकी विकास और यूजर्स की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना भी है। नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे। सरकार का मानना है कि नए नियमों के लागू होने पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा बढ़ेगा। साथ ही, डीपफेक एवं फर्जी सूचनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। यूजर्स के लिए घोषणा करना अनिवार्य किया गया नियमों का पालन न करने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है। नए नियमों के तहत सोशल मीडिया और अन्य बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली गई है। उन्हें ऐसे ऑटोमैटिक टूल लगाने होंगे, जो गैरकानूनी सिंथेटिक कंटेंट को बनने या फैलने से रोक सकें। इसमें बच्चों से जुड़े यौन शोषण, फर्जी पहचान, झूठे दस्तावेज, बिना अनुमति के निजी तस्वीरें, अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री शामिल हैं। प्लेटफॉर्म को अब उपयोगकर्ताओं से यह भी घोषणा करवानी होगी कि अपलोड किया गया कंटेंट एआई से बना है या नहीं, और इसकी जांच भी करनी होगी।