मेट्रो-नमो भारत के पास सस्ते आवास होंगे तैयार
दिल्ली में सस्ते आवास के लिए केन्द्र सरकार ने टीओडी योजना में बदलाव किया है। मेट्रो और रेलवे स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में सस्ते आवास का विकास किया जाएगा। नई नीति में 2000 वर्ग मीटर के भूखंडों का विकास संभव होगा और इसमें आवासीय उपयोग के लिए अधिकतम 65% एफएआर आरक्षित किया गया है।

नई दिल्ली प्रमुख संवाददाता दिल्ली में सस्ते आवास उपलब्ध कराने के लिए मेट्रो, नमो भारत एवं रेलवे स्टेशन के आसपास लगभग 500 मीटर के क्षेत्र में सस्ते आवास बनाने को लेकर केन्द्र सरकार ने पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) योजना में बदलाव किया है। केन्द्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि टीओडी और शुल्क विनियम, 2026 मेट्रो कॉरिडोर के साथ योजनाबद्ध, टिकाऊ और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े आवासन संबंधी शहरी विकास को बढ़ावा देगा। केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि टीओडी की अवधारणा मास्टर प्लान 2021 में पहले ही की जा चुकी है।
इस नीति के अंतर्गत, मेट्रो और आरआरटीएस कॉरिडोर के 500 मीटर के दायरे में योजनाबद्ध, उच्च घनत्व और मिश्रित उपयोग संबंधी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे लोगों के घर से परिवहन व्यवस्था तक पहुंच में सुधार होगा और बड़े पैमाने पर सस्ते आवास तैयार होंगे। इससे 207 वर्ग किलोमीटर (मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500 मीटर और आरआरटीएस/रेलवे स्टेशनों आदि के 500 मीटर के दायरे) का क्षेत्र मुख्य रूप से योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास के माध्यम से सस्ते आवास उपलब्ध कराने के लिए खुलेगा।इस 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में से लगभग 80 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र जो भूमि पूलिंग, कम घनत्व वाले आवासीय क्षेत्र और अनधिकृत कॉलोनियों के अंतर्गत आता है, उसे पिछली टीओडी नीति में शामिल नहीं किया गया था। उसे अब नई टीओडी नीति के दायरे में लाया गया है, जिससे चालू तथा प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर/आरआरटीएस/रेलवे स्टेशनों आदि के साथ-साथ टीओडी विकास हो सकता है।इस योजना में किए गए प्रावधानटीओडी प्रावधानों के अंतर्गत 2000 वर्ग मीटर के छोटे आकार के भूखंडों का विकास संभव होगा।2000 वर्ग मीटर और उससे अधिक के भूखंडों पर 18 मीटर चौड़ी सड़क के साथ टीओडी क्षेत्र में अधिकतम 500 वर्ग मीटर तक के एफएआर की स्वीकृति है।इसमें से स्वीकृति योग्य कुल एफएआर का 65 फीसदी अनिवार्य रूप से आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित किया गया है जिसमें 100 वर्ग मीटर (≤ 99 वर्ग मीटर) के निर्मित क्षेत्र वाली आवासीय इकाइयां शामिल हैं।शेष 35 फीसदी एफएआर में से 10 फीसदी का उपयोग आवासीय क्षेत्र के लिए वाणिज्यिक और अन्य सुविधाओं के प्रावधान के उद्देश्य से किया जाएगा।लचीले रूप से 25 फीसदी एफएआर का उपयोग बड़े आकार के आवास, कार्यालय स्थान, अतिथि गृह और स्टूडियो अपार्टमेंट के निर्माण के लिए किया जा सकता है।टीओडी नियम में किए गए बदलावकिसी भी विकास परियोजना (टीओडी) संबंधी नोड की घोषणा के लिए न्यूनतम 8 हेक्टेयर विकास योग्य भूमि की आवश्यकता वाले नोड-आधारित दृष्टिकोण को कॉरिडोर-आधारित दृष्टिकोण से बदल दिया गया है। इसमें कॉरिडोर चालू या प्रस्तावित हो सकता है।पिछली नीति के अनुसार भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 1 हेक्टेयर होना आवश्यक था। अधिकतम 500 वर्ग मीटर तक का कृषि उपयोग अधिकार (एफएआर) केवल 4 हेक्टेयर के न्यूनतम क्षेत्रफल वाले और 30 मीटर चौड़ी सड़क पर स्थित भूखंडों पर ही स्वीकृत था। अब यह 2000 वर्ग मीटर के छोटे भूखंडों पर भी 18 मीटर चौड़ी सड़क पर स्वीकृत है।वर्तमान नीति में टीओडी भूखंडों के भूमि उपयोग के आधार पर मिश्रित उपयोग का प्रावधान हटा दिया गया है।पिछली नीति के अनुसार, टीओडी परियोजनाओं की स्वीकृति से पहले प्रत्येक टीओडी नोड के लिए प्रभाव क्षेत्र योजना तैयार करना अनिवार्य था। इसके बाद टीओडी परियोजनाओं को स्थानीय निकायों की ओर से स्वीकृति दिया जाना आवश्यक था। अब व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए इसे एकल खिड़की प्रणाली से बदल दिया गया है।डीडीए के उपाध्यक्ष के अधीन टीओडी समिति में सेवा प्रदाता एजेंसियों सहित सभी संबंधित हितधारक शामिल हैं ताकि टीओडी परियोजनाओं की समयबद्ध और सुचारू रूप से स्वीकृति सुनिश्चित की जा सकेअपनी भूमि का विकास करने के इच्छुक नागरिकों को एमसीडी, डीजेबी, डीएफएस आदि जैसी किसी भी सेवा प्रदाता एजेंसी से अलग से संपर्क करने की आवश्यकता के बिना केवल एक ही स्थान पर शुल्क के साथ स्वीकृति के लिए आवेदन करना होगा । यह नीति समयबद्ध स्वीकृति प्रदान करती है।
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