
जेब में आया वेतन कम नहीं होगा
सरकार ने पुराने श्रम कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं और उन्हें चार नई श्रम संहिताओं में बदल दिया है। कंपनियों को अब मूल वेतन का 50% सीटीसी का हिस्सा रखने की आवश्यकता होगी, जिससे ग्रेच्युटी और पीएफ की गणना में बदलाव आएगा। महिला कर्मचारियों के लिए समान वेतन और नियुक्ति पत्र देना भी अनिवार्य किया गया है।
नई दिल्ली। सरकार ने देश के पुराने श्रम कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं और उन्हें चार नई श्रम संहिताओं में बदल दिया है। सरकार इसकी विस्तृत नियमावली अगले 45 दिनों में जारी करेगी। इसके बाद कंपनियों को अपनी वेतन ढांचे को नए प्रावधानों के हिसाब से बदलना होगा। इसका असर ग्रेच्युटी और पीएफ की गणना पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि नई गणना में कर्मचारियों को मिलने वाली ग्रेच्युटी बढ़ सकती है। हालांकि मासिक हाथ आए कुल वेतन (टेक-होम सैलरी) पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। वेतन की नई परिभाषा तय सबसे पहले, सरकार ने ‘वेतन’ की परिभाषा बदल दी है।
अब तक कंपनियां मूल वेतन (बेसिक पे) को कम रखती थीं और बाकी रकम को अन्य भत्तों के रूप में देती थीं। लेकिन नए नियमों में अब कंपनियों को अपने कर्मचारियों का मूल वेतन कुल सीटीसी का कम से कम 50% रखना होगा। वेतन में बेसिक पे (मूल वेतन), महंगाई भत्ता (डीए) और अन्य प्रतिदेय भत्तों को शामिल किया गया है, जबकि मकान किराया भत्ता (एचआरए) और यात्रा भत्ता को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि नए नियमों से वेतन ढांचा अधिक स्पष्ट होगा और सेवानिवृत्ति लाभ बढ़ेंगे। 50 फीसदी मूल वेतन सीमा के आधार पर ग्रेच्युटी, पीएफ, ईएसआईसी, मातृत्व लाभ और अन्य सामाजिक सुरक्षा की गणना की जाएगी। ऐसे समझें नए बदलावों को 1. पीएफ : फिलहाल बड़ा बदलाव नहीं विशेषज्ञों के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) में अभी तुरंत बढ़ोतरी नहीं होगी। पीएफ योगदान की गणना अब भी ₹15,000 की मूल वेतन सीमा पर की जाएगी, जो ईपीएफ नियमों के तहत पहले से तय है। केवल वे कर्मचारी जिनका मूल वेतन और डीए ₹15,000 से कम है, उनके पीएफ में थोड़ा बदलाव हो सकता है। इस वजह से उनका हाथ आए वेतन (टेक-होम सैलरी) में थोड़ी कमी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार जब तक पीएफ कटौती के लिए मूल वेतन की सीमा में बदलाव नहीं करती, इससे जुड़े मौजूदा नियम पहले जैसे ही रहेंगे। 2. ग्रेच्युटी : नई गणना में अधिक फायदा पहुंचेगा अब तक ग्रेच्युटी की गणना केवल मूल वेतन और डीए के आधार पर होती थी, इसलिए कंपनियां मूल वेतन का हिस्सा कम रखती थीं और बाकी रकम भत्तों के रूप में देकर ग्रेच्युटी को कम रखती थीं। लेकिन अब ग्रेच्युटी की गणना कुल सीटीसी के कम से कम 50% हिस्से के अनुसार होगी। यानी 21 नवंबर के बाद नौकरी छोड़ने वाले या सेवानिवृत्ति होने वाले कर्मचारी को पहले से ज्यादा ग्रेच्युटी मिलेगी। 3. ग्रेच्युटी पात्रता: निश्चित अवधि वाले कर्मियों को बड़ा लाभ 1. अनुबंधित कर्मचारी : निश्चित अवधि के लिए अनुबंधित कर्मचारियों को पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए कम-से-कम पांच वर्ष की सेवा अनिवार्य थी। अब इनके एक वर्ष की सेवा पूरी करना ही पर्याप्त होगा। 2. स्पष्टता जरूरी : विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि यदि निश्चित अवधि का अनुबंध बार-बार नवीनीकृत होता है और सेवा में कोई अंतराल नहीं होता है तो क्या इसे निश्चित अवधि का रोजगार नहीं जाएगा। इस पर स्पष्टता जरूरी है। 2. स्थायी कर्मचारी : वहीं, जो कर्मचारी स्थायी हैं, उनके लिए अब भी ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल पूरे करना जरूरी हैं, जब तक कि मामला मृत्यु या विकलांगता का न हो। 4. वेतन घटने की संभावना कम विशेषज्ञों के अनुसार, पीएफ योगदान फिलहाल ₹15,000 रुपये पर सीमित है, जिसका मतबल है कि अधिकांश कर्मचारियों के हाथ आए वेतन (टेक होम सैलरी) पर तुरंत कोई प्रभाव पड़ने की संभावना कम है। कंपनियां नए कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बदलाव कर सकती हैं ताकि नई वेतन परिभाषा के अनुरूप भुगतान संरचना तैयार हो सके, लेकिन मौजूदा कर्मचारियों की वेतन में बदलाव की संभावना कम है। 5. महिला को राहत : ससुराल पक्ष भी परिवार की श्रेणी में शामिल इन श्रम संहिता के तहत महिला कर्मचारियों के लिए ‘परिवार’ की परिभाषा में पहली बार सास-ससुर को भी शामिल किया गया है। साथ ही अब महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। इसके अलावा कार्यस्थल के शिकायत निवारण मंच में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य कर दी गई है। 6. नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य हर कंपनी को अब सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। चाहे वो छोटे दफ्तर में काम करते हों या किसी फैक्ट्री में। इसके साथ ही वेतन हर महीने की सात तारीख तक देना जरूरी होगा और शिकायतों के निपटारे के लिए एक मजबूत प्रणाली भी तैयार की जाएगी।

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