पश्चिम बंगाल में नागरिकता आवेदनों के लिए दो समितियां गठित
केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में नागरिकता आवेदनों की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए दो राज्य-स्तरीय सशक्त समितियों का गठन किया है। ये समितियां नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार बनाई गई हैं। इसमें विभिन्न सरकारी अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य दस्तावेजों का सत्यापन और नागरिकता प्रदान करने की सिफारिश करना है।

केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में नागरिकता आवेदनों की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए दो राज्य-स्तरीय सशक्त समितियों का गठन किया है। यह कदम नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6बी तथा नागरिकता नियम, 2009 के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इन समितियों की अध्यक्षता केंद्र सरकार के उप सचिव से कम रैंक के अधिकारी नहीं करेंगे, जिन्हें भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त द्वारा नामित किया जाएगा। प्रत्येक समिति में सहायक खुफिया ब्यूरो (एसआईबी) के अधिकारी, क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण अधिकारी (एफआरआरओ) द्वारा नामित अधिकारी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के राज्य सूचना अधिकारी द्वारा नामित अधिकारी तथा पश्चिम बंगाल के पोस्टमास्टर जनरल या उनके द्वारा नामित अधिकारी शामिल होंगे।
इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार के गृह विभाग के प्रतिनिधि और संबंधित मंडल रेल प्रबंधक के प्रतिनिधि आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल होंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अन्य शर्तें 11 मार्च 2024 की पूर्व अधिसूचना के अनुरूप रहेंगी। धारा 6बी को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (सीएए) के माध्यम से जोड़ा गया था। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। अधिकारियों के अनुसार, इन समितियों का गठन आवेदनों की जांच, दस्तावेजों के सत्यापन और नागरिकता प्रदान करने संबंधी सिफारिशों के लिए किया गया है। बांग्लादेश से लगी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा और ऐतिहासिक प्रवासन के कारण पश्चिम बंगाल को इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है।
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