गुमनाम साइबर शिकायतों पर कार्रवाई करना जरूरी

Apr 04, 2026 06:21 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की गुमनाम शिकायतों पर कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता की पहचान न होने के कारण शिकायतों को बंद नहीं किया जा सकता। एनसीआरपी पोर्टल पर बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।

गुमनाम साइबर शिकायतों पर कार्रवाई करना जरूरी

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों से जुड़ी गुमनाम शिकायतों पर अनिवार्य रूप से कार्रवाई की जाए। केवल इस आधार पर उन्हें बंद न किया जाए कि पीड़ित की पहचान नहीं हो पा रही है। गृह मंत्रालय के तहत संचालित भारत के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज हो रहीं शिकायतों की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई राज्य एजेंसियां गुमनाम शिकायतों को ‘पीड़ित की पहचान नहीं’ होने का हवाला देकर बंद कर रही हैं। उन शिकायतों में बताए गए आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।सूत्रों

के मुताबिक, बड़ी संख्या में शिकायतें केवल इसलिए खारिज हो रही थीं क्योंकि वे गुमनाम थीं, जिससे खतरनाक और आपत्तिजनक सामग्री इंटरनेट पर बनी रहती हैं। केंद्र ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए स्पष्ट किया है कि शिकायतकर्ता या पीड़ित की पहचान न होना किसी भी मामले को बंद करने का आधार नहीं हो सकता, खासकर तब जब मामला बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएम), ऑनलाइन बाल अश्लीलता या यौन शोषण से जुड़ा हो।गौरतलब है कि एनसीआरपी पोर्टल नागरिकों को विशेष रूप से बाल अश्लीलता, दुष्कर्म या गैंगरेप से जुड़े मामलों में गुमनाम रूप से शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। इस पोर्टल का संचालन इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (आई 4सी) द्वारा किया जाता है। इसका मकसद है कि डर या सामाजिक दबाव के कारण सामने न आ पाने वाले पीड़ित या गवाह भी शिकायत दर्ज कर सकें। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि राज्यों के स्तर पर इन शिकायतों को बंद करने की प्रवृत्ति से इस व्यवस्था का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।केंद्र ने निर्देश दिया है कि भले ही शिकायतकर्ता की पहचान अज्ञात हो, लेकिन रिपोर्ट किए गए कंटेंट पर त्वरित कार्रवाई, विशेषकर उसे हटाने (टेकडाउन) की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।--लगातार बढ़ रहीं शिकायतेंगृह मंत्रालय द्वारा संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, बाल अश्लीलता/सीएसएम से जुड़ी शिकायतें 2021 में 2,109 से बढ़कर 2025 में 10,431 हो गईं यानी लगभग पांच गुना वृद्धि हुई है। फर्जी और प्रतिरूप (इम्पर्सोनेशन) प्रोफाइल के मामले 15,843 से बढ़कर 46,784 हो गए हैं। साइबर बुलिंग, स्टॉकिंग और सेक्सटिंग के मामले 21,589 से बढ़कर 45,832 तक पहुंच गए। प्रोफाइल हैकिंग और पहचान चोरी के मामले 2024 में 38,297 के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद 2025 में मामूली घटकर 34,533 रहे।

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