Hindi NewsNcr NewsDelhi NewsGovernment Denies Discrimination in Permanent Commission for Women in Indian Air Force
स्थायी कमीशन देने में भेदभाव नहीं किया गया : केंद्र

स्थायी कमीशन देने में भेदभाव नहीं किया गया : केंद्र

संक्षेप:

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने में भेदभाव नहीं किया गया। 2019 से 243 पुरुष और 177 महिलाओं को स्थायी कमीशन दिया गया है। न्यायालय ने नीति की समीक्षा का आश्वासन दिया, लेकिन महिला अधिकारियों के साथ उचित व्यवहार न होने का दावा किया गया।

Dec 10, 2025 10:58 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने में भेदभाव और पक्षपात के आरोपों का खंडन किया। केंद्र ने कहा कि वर्ष 2019 से अब तक 243 पुरुष और 177 महिलाओं को भर्ती किया गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने स्थायी कमीशन से इनकार को चुनौती देने वाली एसएससी के तहत भर्ती महिला अधिकारियों की याचिकाओं के एक समूह पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि केंद्र द्वारा 2022 में मंजूरी दिए जाने के बाद, भारतीय वायुसेना ने एनडीए के माध्यम से महिला अधिकारियों की भर्ती शुरू की और प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने पर इन अधिकारियों को सीधे स्थायी कमीशन दिया जाएगा।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

इसलिए नहीं दिया गया स्थायी कमीशन केंद्र सरकार की ओर से पेश हुईं भाटी ने कहा कि इन अधिकारियों पर एचआरपी मानव संसाधन नीति 2019 के प्रावधानों के तहत तीन योग्य अवसरों पर निष्पक्ष रूप से विचार किया गया था, लेकिन न्यूनतम प्रदर्शन मानदंड (एमपीसी) पूरा न करने और अपने-अपने विभागों में उपलब्ध रिक्तियों के लिए योग्यता के आधार पर अर्हता प्राप्त न कर पाने के कारण उन्हें स्थायी कमीशन नहीं दिया जा सका। 2019 से अब तक 177 महिलाओं का स्थायी कमीशन उन्होंने कहा कि 2019 की मानव संसाधन नीति मई 2006 के बाद नियुक्त सभी जीडी (ग्राउंड ड्यूटी) शाखा के एसएससी अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करती है। भाटी ने कहा कि 2019 से अब तक 243 पुरुष एसएससी अधिकारियों और 177 महिला एसएससी अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जा चुका है। अदालत नीति की समीक्षा करेगी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस नीति की समीक्षा करेगी, लेकिन सीमित रिक्तियों के संबंध में कुछ नहीं किया जा सकता क्योंकि यह एक नीतिगत निर्णय है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने भाटी के तर्क का विरोध करते हुए दावा किया कि भारतीय वायु सेना में स्थायी कमीशन देने के मामले में पुरुष अधिकारियों की तुलना में महिला अधिकारियों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाता है। पीठ ने दलीलें सुनने के बाद पक्षों को 19 दिसंबर तक लिखित दलीलें प्रस्तुत करने को कहा।