छोटे नोटों की किल्लत दूर करेंगे हाइब्रिड एटीएम

Jan 27, 2026 07:29 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार 10, 20 और 50 रुपये के छोटे नोटों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नई मशीनों और हाइब्रिड एटीएम पर विचार कर रही है। नोटों की कमी के कारण लोगों और व्यापारियों को परेशानी हो रही है। यह पहल रोजमर्रा के नगद लेन-देन में सुधार लाने के उद्देश्य से की जा रही है।

छोटे नोटों की किल्लत दूर करेंगे हाइब्रिड एटीएम

नई दिल्ली। केंद्र सरकार 10, 20 और 50 रुपये छोटे मूल्य के नोटों को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इसके लिए जगह-जगह पर छोटे नोट वितरित करने वाली मशीनें या हाइब्रिड एटीएम लगाए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य बाजार में लंबे समय से बनी छोटे नोटों की कमी को दूर करना है। नोटबंदी के लगभग एक दशक बाद भी रोजमर्रा के नगद लेन-देन में छोटे नोटों की कमी के कारण आम लोगों और व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार का मानना है कि छोटे मूल्य के नोटों की पर्याप्त उपलब्धता से नगद लेन-देन सुचारु होगा और खुदरा बाजार में आने वाली दिक्कतें कम होंगी।

कई प्रस्तावों पर चल रहा काम सरकार के भीतर चल रही चर्चाओं से जुड़े दो अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि छोटे मूल्य के नोटों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई नए प्रस्तावों पर काम किया जा रहा है। इनमें ऐसी नई मशीन लगाने की योजना शामिल है, जो मांग के अनुसार 10, 20 और 50 रुपये के नोट जारी कर सकेगी। इसके अलावा एक ‘हाइब्रिड एटीएम’ का प्रस्ताव भी है, जो बड़े मूल्य के नोटों को छोटे नोटों और सिक्कों में बदलने में सक्षम होगी। साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक पर छोटे मूल्य के नोटों की छपाई बढ़ाने का दबाव बनाने की रणनीति भी इन प्रस्तावों का हिस्सा है। परियोजना पर चल रहा है परीक्षण एक अधिकारी के अनुसार, छोटे मूल्य के नोट जारी करने वाली मशीन का एक प्रारूप मुंबई में एक प्रायोगिक परियोजना के तहत परीक्षण के दौर से गुजर रहा है। मंजूरी मिलने के बाद इस प्रणाली को पूरे देश में लागू किए जाने की उम्मीद है। इन मशीनों को यातायात केंद्रों, बाजारों, अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों जैसे अधिक भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जाएगा। बैंक ऑफ बड़ौदा कर चुका है परीक्षण दूसरे अधिकारी ने बताया कि यह हाईब्रिड एटीएम पारंपरिक स्वचालित नकद मशीन और सिक्का वितरण मशीन—दोनों की कार्यप्रणाली को एक साथ जोड़ेगी। इससे उपयोगकर्ता एक ही लेन-देन में बड़े मूल्य के नोटों को छोटे नोटों और सिक्कों में बदल सकेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही मुंबई की एक बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में इस संकर स्वचालित नकद मशीन मॉडल का परीक्षण कर चुका है। कम होगी लोगों-दुकानदारों की परेशानी यह पहल रोजमर्रा के भुगतानों में छोटे मूल्य के नोटों की लगातार बनी कमी को देखते हुए की जा रही है। इससे दुकानदारों और आम लोगों को होने वाली परेशानी कम हो सकती है, जिन्हें अक्सर 500 रुपये के नोट का खुला देने में दिक्कत आती है। छोटे नोटों की कमी के कारण कई बार लेन-देन में देरी होती है या फिर कीमतों में गोल-मोल कर समझौता करना पड़ता है। यह कदम उन लोगों के लिए भी राहत लेकर आ सकता है, जो अब भी नकद पर अधिक निर्भर हैं। खासकर शहरी अनौपचारिक क्षेत्रों और अर्ध-शहरी इलाकों में, जहां डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता अब भी समान रूप से नहीं हो पाई है। क्या कहते हैं आंकड़े आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, चलन में मौजूद 500 रुपये के नोट मुद्रा की कुल संख्या का 41.2% और कुल मूल्य का लगभग 86% हिस्सा रखते हैं। इसके मुकाबले छोटे मूल्य के नोट जैसे दो, पांच, 10, 20 और 50 रुपये कुल मुद्रा की मात्रा का करीब 38% हिस्सा हैं, लेकिन कुल मूल्य में इनकी हिस्सेदारी केवल 3.1% है। शेष हिस्सा 100 और 200 रुपये के नोटों का है। विशेषज्ञों की राय... भारत रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत का कहना है कि चलन में अधिक संख्या में छोटे मूल्य के नोट होने से दैनिक लेन-देन को सुगमता मिलेगी। खासकर ग्रामीण इलाकों में इसका लाभ अधिक होगा, जहां स्मार्ट फोन अब भी व्यापक रूप से इस्तेमाल नहीं किए जाते हैं और डिजिटल लेन-देन की सुविधा सीमित है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मशीनें लगाना ही इस समस्या का पूरा समाधान नहीं है। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित किए बिना मशीनें अकेले प्रभावी साबित नहीं होंगी। इसके लिए छोटे मूल्य के नोटों की छपाई, उनकी लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और री-साइक्लिंग को भी समानांतर रूप से मजबूत करना होगा।

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