दुनिया में हर साल 3.5 करोड़ टन मछली बर्बाद
एक हालिया अध्ययन के अनुसार, समुद्री मत्स्यपालन क्षेत्र में बेहतर अवस्थापना की कमी के कारण हर साल 2.5 से 3.5 करोड़ टन मछली बर्बाद होती है। पुडुचेरी में आयोजित कार्यशाला में बताया गया कि भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में कोल्ड स्टोरेज की कमी इस समस्या का मुख्य कारण है।

कोच्चि/ पुडुचेरी, एजेंसी। समुद्री मत्स्यपालन क्षेत्र में बेहतर अवस्थापना की कमी से दुनियाभर में हर साल 2.5 से 3.5 करोड़ टन मछली बर्बाद हो रही है। एक ताजा अध्ययन में यह दावा किया गया है। गुरुवार को पुडुचेरी में बंगाल की खाड़ी इलाके में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में यह अध्ययन पेश किया गया। बताया गया कि यूनाइटेड नेशंस फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन और बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन (बीओबीपी-आईजीओ) ने यह अध्ययन किया। बताया कि कुल पकड़ी गई मछलियों का 20-60 प्रतिशत खत्म हो जाता है। कुछ इलाकों में यह नुकसान 75 प्रतिशत तक है, जिससे मछुआरों की आय पर बुरा असर पड़ता है।
बीओबीपी-आईजीओ निदेशक डॉ. पी कृष्णन ने बताया कि भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम समेत 11 एशियाई देशों में कोल्ड स्टोरेज की कमी समेत कई अवस्थापना कमियां इस नुकसान की वजह हैं।

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