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कॉप-30: बड़ी चुनौतियों के बीच ब्राजील में आज से जलवायु शिखर सम्मेलन

कॉप-30: बड़ी चुनौतियों के बीच ब्राजील में आज से जलवायु शिखर सम्मेलन

संक्षेप: जलवायु पर शिखर सम्मेलन COP30 सोमवार से ब्राजील के बेलेम शहर में शुरू हो रहा है। इस सम्मेलन में 200 देशों के 50,000 से अधिक लोग शामिल होंगे। सम्मेलन में 57 राष्ट्राध्यक्षों और 39 मंत्रियों के साथ 140 से अधिक प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं। सम्मेलन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधों को लागू करना है।

Sun, 9 Nov 2025 08:45 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ब्राजील के बेलेम शहर में जुटे दुनियाभर नेता ट्रंप शामिल नहीं हो रहे, अन्य अमेरिकी नेता शामिल होंगे प्रमुख बातें -कॉप30 में 200 देशों के 50,000 से अधिक लोग शामिल होंगे -नेताओं के शिखर सम्मेलन में, 140 से अधिक प्रतिनिधिमंडल -लगभग 57 राष्ट्राध्यक्षों और 39 मंत्री, ब्राजील इस वर्ष का मेजबान है -10 से21 नवंबर तक चलेगा सम्मेलन बेलेम(ब्राजील)एजेंसी। कई चुनौतियों के बीच जलवायु पर शिखर सम्मेलन सोमवार से ब्राजील के बेलेम शहर में शुरू हो रहा है। दुनियाभर के हजारों प्रतिनिधि इस सम्मेलन के लिए बेलेम में इकट्ठा हो चुके हैं। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक तापमान ने नए रिकॉर्ड दर्ज किए हैं और चरम मौसम सहित जलवायु परिवर्तन के अन्य प्रभाव दुनियाभर में लोगों पर असर डाल रहे हैं।

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कॉप क्या है? कॉपी का मतलब है 'पार्टियों का सम्मेलन'। यह वार्षिक शिखर सम्मेलन उन देशों को एक साथ लाता है जिन्होंने 1992 की संयुक्त राष्ट्र जलवायु संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस संधि का मुख्य उद्देश्य सभी देशों को मिलकर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिबद्ध करना है। यह संधि यह भी स्थापित करती है कि अमीर देशों की, जिन्होंने ग्रह-वार्मिंग उत्सर्जन में अधिक योगदान दिया है, समस्या को हल करने की जिम्मेदारी ज्यादा है। इस बार 30वां सम्मेलन हो रहा है इसलिए इसे कॉप-30 कहा जा रहा। पिछले कुछ वर्षों में, ये वार्षिक शिखर सम्मेलन भू-राजनीतिक और वित्तीय चर्चा का एक प्रमुख केंद्र बन गए हैं। इस साल का कॉप-30 क्यों महत्वपूर्ण है? कॉप का 30वां सम्मेलन बहुत खास है। 33 साल पहले ब्राजील में ही जलवायु संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। यह एक तरह से अपनी जड़ों की ओर लौटना है। ब्राजील चाहता है कि नए वादे करने के बजाय, देश पिछले वादों को पूरा करने पर ध्यान दें, जैसे कि कॉप28 में जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को धीरे-धीरे खत्म करने का वादा। ब्राजील ने इसे अमेजन के वर्षावन शहर बेलेम में आयोजित करने का फैसला किया है। यह दुनिया को उन जंगलों का महत्व दिखाता है जो जलवायु के लिए बहुत जरूरी हैं और खतरे में हैं। इसके अलावा पहली बार है जब कॉप ने स्वीकार किया है कि हम तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रोकने के अपने लक्ष्य को पूरा करने में असफल रहे हैं। सम्मेलन में मुख्य रूप से कौन बातचीत करता है? शिखर सम्मेलन में ज्यादातर सरककारों की टीमें वार्ता करती हैं। प्रमुख आवाजों में छोटे द्वीपीय देशों का गठबंधन (जो डूबने के खतरे का सामना कर रहे हैं) और विकासशील देश शामिल हैं हैं। इसके अलावा, अफ्रीका समूह और ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत, चीन भी प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। जलवायु वित्त सबसे बड़ा एजेंडा जलवायु वित्त इस बार भी सबसे बड़ा मुद्दा है। कॉप 29 में 2035 तक 300 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य था,कॉप 30 में इसे अंतिम रूप दिया जाना है। अमेरिका के पीछे हटने से इसपर असर पड़ेगा। तापमान वृद्धि: तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रखने का संकल्प दोहराया जाएगा। 95 फीसदी देशों के समय सीमा चूकने के बाद इस लक्ष्य को 2035 तक बढ़ा दिया गया था। -जीवाश्म ईंधन के चरणबद्ध उन्मूलन पर बातचीत के वादे पर भी नजर सम्मेलन के सामने कई चुनौतियां अमेरिकी बाधा: ट्रंप प्रशासन ने पेरिस समझौते से बाहर निकलकर, जलवायु विज्ञान में कटौती करके, और नवीकरणीय परियोजनाओं को रद्द करके जलवायु कार्रवाई को बाधित किया है। बिगड़ती जलवायु आपदा: पिछले साल, औसत वैश्विक तापमान पहली बार 1.5°C से ऊपर चला गया, जो एक गंभीर चेतावनी है। बढ़ती आपदाएं: जलवायु परिवर्तन से होने वाली महंगी आपदाएं बढ़ रही हैं अव्यवस्था: बेलेम सम्मेलन में प्रतिनिधियों की संख्या कम हो सकती है। कई तरह की अव्यवस्थाएं भी इस बार हैं, बुनियादी ढांचों और होटलों की कमी के कारण दिक्कतें आ रही हैं। दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन से हालात खराब -वैश्विक तापमान ने 2023 और 2024 में नए रिकॉर्ड दर्ज किए। तापमान हर दशक 0.27 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ रहा। 2030 के आसपास इसके गंभीर परिणाम होंगे। -समुद्र का स्तर बढ़ रहा: पिछले दशक में लगभग 4.5 एमएम प्रति वर्ष बढ़ा है। -ग्लेशियर पिघल रहे: वैज्ञानिक दक्षिणी महाद्वीप के आसपास समुद्री बर्फ के घटने को लेकर चिंतित हैं। -चरम मौसम: दुनियाभर में जलवायु संकट के कारण चरम मौसम(बाढ़, तूफान, चक्रवात, भीषण गर्मी) की घटनाएं हो रहीं