अध्ययन : मोतियाबिंद की जरूरी सर्जरी से आधे मरीज वंचित
- द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित - 9.4 करोड़ से ज्यादा मोतियाबिंद

नई दिल्ली, एजेंसी। दुनिया भर में मोतियाबिंद से पीड़ित दो में एक मरीज को जरूरी सर्जरी उपलब्ध नहीं हो पा रही, जो उनकी आंखों की रोशनी वापस ला सकती है। लैंसेट ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन के शोधकर्ताओं ने 68 देशों में राब (रैपिड असेसमेंट ऑफ अवॉयडेबल ब्लाइंडनेस) नामक सर्वे किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन की अपील विश्व स्वास्थ्य संगठन ने देशों से अपील की है कि वे मोतियाबिंद से पीड़ित करोड़ों लोगों तक सरल और प्रभावी सर्जरी की पहुंच तेजी से सुनिश्चित करें। संगठन के अनुसार, दुनिया भर में 9.4 करोड़ से अधिक लोग मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) की समस्या से जूझ रहे हैं।
मोतियाबिंद की सर्जरी 15 मिनट की आसान प्रक्रिया है, जिससे मरीज की आंख में रोशनी वापस आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 2030 तक सर्जरी की पहुंच 30फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करना है, तो महिलाओं और गरीब वर्गों को प्राथमिकता देनी होगी। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में आंखों की जांच जोड़ने के साथ सर्जरी सुविधाएं बढ़ानी होंगी। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ानी होगी। लक्ष्य से पीछे अध्ययन के अनुसार, पिछले दो दशकों में दुनिया भर में मोतियाबिंद सर्जरी की पहुंच में करीब 15 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद बुजुर्ग आबादी और मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण सर्जरी की मांग भी लगातार बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, मौजूदा दशक में सर्जरी की पहुंच में महज 8.4 फीसदी की ही बढ़ोतरी संभव है। यह आंकड़ा उस लक्ष्य से काफी पीछे है, जिसे 2021 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने तय किया था, कि 2030 तक इसकी सर्जरी की पहुंच में 30 फीसदी की वृद्धि की जाएगी।

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