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17 जनवरी, 2021|9:49|IST

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लड़की बालिग निकली, बाल गृह से रिहा करने के निर्देश

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नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दस्तावेजों के आधार पर बालिग साबित होने पर एक लड़की को बाल गृह से रिहा करने का निर्देश दिया। दरअसल, लड़की के पिता ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया था कि वह नाबालिग है, जिसके बाद पुलिस ने उसे बाल गृह में रखा था।

न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि यदि युवती की इच्छा हो तो उसे उसके पति के साथ भेज दिया जाए। उल्लेखनीय है कि युवती के पति ने उच्च न्यायालय में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपनी पत्नी को रिहा करने का अनुरोध किया था। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का उपयोग किसी ऐसे व्यक्ति को न्यायालय में पेश करने का निर्देश जारी कराने के लिए किया जाता है, जो लापता हो या जिसे अवैध रूप से हिरासत में रखा गया हो। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान युवती को पीठ के समक्ष पेश किया गया। युवती ने कहा कि उसका जन्म जून 2002 में हुआ था, न कि फरवरी 2004 में, जैसा कि उसके पिता ने दावा किया है। साथ ही युवती ने न्यायालय से कहा कि वह अपनी इच्छा के साथ युवक के साथ गई थी और 18 दिसंबर 2020 को उसने शादी की थी। उच्च न्यायालय ने पुलिस को मौखिक रूप से कहा कि वह दंपति के जीवन को खतरे में न पड़ने दे।

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  • Web Title:Girl turns out to be a child directed to release her