
गिग वर्कर्स यूनियन ने रखी सामाजिक सुरक्षा कोड को लागू करने की मांग
संक्षेप: - केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री के सामने उठाया राष्ट्रीय कल्याण बोर्ड गठन का मुद्दा नई दिल्ली। विशेष संवाददाता गिग और ई-प्लेटफॉर्म वर्कर्स से जुड़े संगठन ने सामाजिक सुरक्षा कोड -2020 के तहत सामाजिक...
- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री के सामने उठाया राष्ट्रीय कल्याण बोर्ड गठन का मुद्दा नई दिल्ली। विशेष संवाददाता गिग और ई-प्लेटफॉर्म वर्कर्स से जुड़े संगठन ने सामाजिक सुरक्षा कोड -2020 के तहत सामाजिक सुरक्षा ढांचे को तत्काल लागू करने की मांग की है। इसको लेकर देशभर के ऐप-आधारित परिवहन और डिलीवरी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (आईएफएटी) ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को अपना मांग पत्र सौंपा है। संगठन की तरफ से कहा गया है कि सामाजिक सुरक्षा कोड, 2020 भारत का पहला ऐसा कानून था जिसने गिग और ई- प्लेटफॉर्म वर्कर्स को औपचारिक रूप से मान्यता दी और उनके कल्याण के लिए वैधानिक ढांचा तैयार किया।

इसमें जीवन एवं विकलांगता बीमा, दुर्घटना कवर, स्वास्थ्य व मातृत्व लाभ और वृद्धावस्था सुरक्षा जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया गया, लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कल्याणकारी योजना लागू नहीं की गई, जिससे करोड़ों गिग वर्कर्स अभी तक सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। संगठन का दावा है कि देशभर में दो करोड़ से अधिक ऐप-आधारित श्रमिक हैं, जिनमें ड्राइवर, डिलीवरी कर्मी और घरेलू सेवा प्रदाता शामिल हैं,जो बिना किसी औपचारिक अधिकार, न्यूनतम सुरक्षा या संस्थागत सहयोग के कार्य कर रहे हैं। जबकि वह भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यूनियन ने जोर दिया कि शीघ्र कार्यान्वयन न्याय, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा कोड को लागू करने आवश्यक है, जिससे इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ते कार्यबल के हितों की रक्षा की जा सके। यूनियन ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए राष्ट्रीय कल्याण बोर्ड का गठन करे और एग्रीगेटर कंपनियों के योगदान से सामाजिक सुरक्षा कोष को सक्रिय किए जाने की मांग रखी है।

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