
जेन-जी को अब ताजे फूल नहीं, सूखे फूल पसंद
- पुराने फूल इस्तेमाल करने से कम पैसा होगा खर्च - युवा पीढ़ी को पसंद
ओटावा, एजेंसी। जेन-जी (युवा पीढ़ी) अब अपनी शादियों या अन्य खास कार्यक्रमों के लिए ताजे फूलों के बजाय पर्यावरण के अनुकूल, सूखे और दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले विकल्प अपना रही है। हाल ही में इस संबंध में कनाडा स्थित ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एक अध्ययन किया है। दरअसल, इस पीढ़ी का मानना है कि वे ज्यादा पैसा खर्च करने से बच सकते हैं। उनका मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले फूलों से सजा गुलदस्ता सामान्य फूलों से कहीं ज्यादा समय तक चलता रहा। वे अब बाहर से लाए गए फूलों की पर्यावरण लागत, जैसे प्लास्टिक पैकिंग और परिवहन में लगने वाले फ्यूल के बारे में अधिक सोच रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रा के दौरान फूलों की ताजगी बनाए रखने के लिए उन्हें ठंडे तापमान में रखना पड़ता है, जिसमें बहुत ज्यादा ऊर्जा और ग्रीन हाउस गैस खर्च होती है। बड़े खेत बनाने के लिए पेड़-पौधों को काटा जाता है। यह तरीका मिट्टी के पोषक तत्व को कम करता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। सूखे फूल, कागज के फूल और दोबारा इस्तेमाल होने वाले फूलों की बढ़ती मांग को देखते हुए व्यापारी भी यही ट्रेंड अपना रहे हैं। युवा पीढ़ी अब पौधों और जंगली फूलों को भी चुन रही है, जिससे पता चलता है कि उनके लिए टिकाऊ विकल्प दिखावे से ज्यादा महत्वपूर्ण है। जेन-जी से पिछली पीढ़ी, यानी मिलेनियल्स भी इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




