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विदेश: पाकिस्तान के पूर्व आईएसआई चीफ को 14 साल की कैद - पूर्व

Dec 11, 2025 06:18 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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विदेश: पाकिस्तान के पूर्व आईएसआई चीफ को 14 साल की कैद - पूर्व पीएम इमरान खान के करीबी माने जाते हैं फैज हमीद - 15 माह तक कोर्ट मार्शल की कार्रवाई चली इस्लामाबाद, एजेंसी। पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने गुरुवार को पूर्व आईएसआई चीफ फैज हमीद को सैन्य कानूनों का उल्लंघन करने पर 14 साल के कैद की सजा सुनाई। यह जानकारी पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने दी। पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार किसी पूर्व आईएसआई चीफ का कोर्ट मार्शल कर जेल भेजा गया है। लगाए गए ये आरोप उनके खिलाफ अगस्त 2024 में कोर्ट मार्शल की कार्रवाई शुरू हुई थी, जो करीब 15 महीने तक चली।

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फैज पर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने, ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट का उल्लंघन कर देश के हितों को नुकसान पहुंचाने, सरकारी अधिकार और संसाधनों का दुरुपयोग करने और लोगों को नुकसान पहुंचाने के आरोप थे। सेना ने कहा कि कोर्ट ने सभी आरोपों में फैज को दोषी पाया है, हालांकि उन्हें फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार भी दिया गया है। कौन हैं फैज हमीद फैज को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का करीबी माना जाता है। ऐसी भी खबरें थी कि इमरान खान, जनरल कमर जावेद बाजवा के रिटायरमेंट के बाद फैज हामिद को अगला सेना प्रमुख बनाना चाहते थे। लेकिन उनके जेल जाने के साथ ही फैज के बुरे दिन शुरू हो गए। फैज हमीद पाकिस्तानी सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल हैं। उन्होंने साल 2019 से लेकर 2021 तक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के डायरेक्टर जनरल के तौर पर भी काम किया है। फैज का जन्म पाकिस्तान के चकवाल के लतीफाल गांव में हुआ था। 1987 में वे पाकिस्तान मिलिट्री अकेडमी में शामिल हुए। फैज हमीद पाकिस्तान की सेना में पेशावर के कोर कमांडर भी रहे हैं। तालिबान की वापसी पर अफगान गए थे फैज सितंबर 2021 में फैज हमीद की एक तस्वीर वायरल हुई थी। दरअसल, अफगानिस्तान में अमेरिकी सत्ता के पतन और तालिबान की वापसी के तुरंत बाद आईएसआई के तत्कालीन चीफ फैज हमीद काबुल गए थे। वहां चाय पीते उनके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी जिसकी तस्वीर पूरी दुनिया ने देखा। काबुल में अफरा-तफरी के बावजूद फैज काफी सुकून में थे। यहां तक कि एक विदेशी पत्रकार ने जब उनसे अफगानिस्तान के हालात पर सवाल किया तब उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा था, ‘चिंता न करें, सब ठीक हो जाएगा।’ यह दुनिया के लिए एक संदेश था कि अफगानिस्तान में अब पाकिस्तान की ‘मनमर्जी’ चलेगी। उस समय उन्हें ‘काबुल का वायसराय’ कहा जा रहा था।