
पीएम-सीएम को पद से हटाने वाले बिल पर जेपीसी के गठन का रास्ता साफ
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आरोपों में 30 दिन से अधिक समय तक गिरफ्तार रहने पर पद से हटाने से जुड़े विधेयकों की समीक्षा के लिए संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) गठित करने का रास्ता साफ हो गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की बात कही।
कोहिमा, एजेंसी। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आरोपों में 30 दिन से अधिक समय तक गिरफ्तार रहने पर पद से हटाने से जुड़े विधेयकों की समीक्षा के लिए संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) गठित करने का रास्ता साफ हो गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कहा कि वह यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि प्रस्तावित समिति में सभी दलों का प्रतिनिधित्व हो। कोहिमा में पत्रकारों से बातचीत में बिरला ने कहा, संसदीय समितियों को राजनीति के नजरिये से नहीं देखना चाहिए। ये ऐसी समितियां हैं, जहां राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होती है।

यह समिति जल्द गठित होने की उम्मीद है। लोकसभा अध्यक्ष यहां राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र जोन-तीन के 22वें वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता करने पहुंचे हैं। बता दें कि यह विधेयक संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन (20 अगस्त) को पेश किया गया था। लोकसभा ने इन तीनों विधेयकों को संयुक्त समिति को भेजने का प्रस्ताव पारित किया था। --- जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करना लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं बिरला ने कहा, सदन की कार्यवाही में जानबूझकर व्यवधान डालना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर को शुरू होकर 19 तक चलेगा, जिसमें 15 बैठकें होंगी। विपक्ष ने सत्र की छोटी अवधि को लेकर सरकार पर हमला बोला है। इस पर पूछे गए सवाल पर बिरला ने कहा कि संसद सत्र बुलाना सरकार का विशेषाधिकार है और इसकी अवधि आधिकारिक एजेंडे पर निर्भर करती है। सत्र की अवधि पर निर्णय सरकार लेती है। हमारा प्रयास होगा कि हम सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा करके सदन की कार्यवाही को सुचारू बनाएं। विधानसभाओं को क्षेत्रीय विकास की दिशा में काम करना चाहिए बिरला ने कोहिमा में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र जोन-तीन के 22वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, हमारी विधानसभाओं को क्षेत्रीय विकास और औद्योगिक वृद्धि को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों की दिशा में काम करना चाहिए। साथ ही नीतिगत निर्णयों से स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया जाना चाहिए। बिरला ने पूर्वोत्तर राज्यों की उनके गहरे लोकतांत्रिक मूल्यों, निर्णय लेने में एकता और प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि दो दिवसीय सम्मेलन विधायी संस्थाओं को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कार्य करेगा। भारत के विकास के लिए पूर्वोत्तर महत्वपूर्ण: उपसभापति हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने इस अवसर पर कहा, भारत के विकास की यात्रा में पूर्वोत्तर की भूमिका महत्वपूर्ण है। यहां आठ पूर्वोत्तर राज्यों से बने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र जोन-III के 22वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधन के दौरान ये बात कही। उन्होंने कहा, विधायिका लोकतंत्र का आधार बनी हुई है और इसे नीति और लोगों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करना चाहिए। हरिवंश ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है और इस राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ अपनी प्राथमिकताओं को जोड़कर प्रत्येक राज्य को इसमें योगदान देना चाहिए।

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