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नई दिल्लीसिंघू बॉर्डर: लंगरों की वजह से स्थानीय होटलों का बजट बिगड़ा, बंद होने की आई नौबत

एजेंसी,नई दिल्लीPublished By: Ashutosh Ray
Sat, 23 Jan 2021 08:10 PM
सिंघू बॉर्डर: लंगरों की वजह से स्थानीय होटलों का बजट बिगड़ा, बंद होने की आई नौबत

जब सिंघु बॉर्डर पर सड़क के किनारे स्थित राजपूताना रेस्तरां के मालिक को लगने लगा कि वह कोविड-19 महामारी के सबसे खराब आर्थिक संकट से निकल चुके हैं, तो किसानों का विरोध शुरू हो गया। दो महीने बाद भी उनका रेस्तरां खाली है, लेकिन राजमार्ग पूरा भरा हुआ है।

चौबीसों घंटे लंगर सेवा चलने, उद्योगों के पूरी तरह से बंद होने और लोगों तथा वाहनों की आवाजाही कम होने से दिल्ली-हरियाणा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थिति कई भोजनालयों की आर्थित स्थिति बहुत खराब होती जा रही है। हजारों किसान 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें ज्यादातर किसान पंजाब और हरियाणा से हैं। किसानों की मांग है कि तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए।

होटल के मालिक ओम प्रकाश राजपूत ने कहा, लोग यहाँ भोजन करने क्यों आएंगे जब उन्हें यह बाहर लंगरों में मुफ्त भोजन मिल रहा है? 40 वर्षीय राजपूत ने कहा, क्या व्यवसाय? कोई भी नहीं आता है। मैं इस दुकान के लिए 35000 रुपए किराए का भुगतान कर रहा हूं और आठ कर्मचारी हैं। बिना किसी आय के मैं कब तक कर्मचारियों के वेतन और किराए का प्रबंध कर सकता हूं? यदि यह इसी तरह जारी रहा, तो मेरे पास इसे बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा?

रेस्तरां में एक रसोइए के रूप में काम करने वाले व बिहार के रहने वाले 23 साल के मोहम्मद एहसान ने कहा कि राजपूत ने उन्हें बताया कि वह अगले महीने भोजनालय बंद कर देंगे। एहसान का वेतन 17000 रुपए से घटकर 14000 रुपए हो गया है। वह पहले से ही एक नई नौकरी की तलाश कर रहा है। 

होटल की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। ऐसी ही हालत एक अन्य छोटी सी भोजनालय पंजाबी जायका का भी है, जिसकी हर दिन की बिक्री 1200 रुपए से भी कम की है। इस होटल के भविष्य पर भी तलवार लटका हुआ है। कमोबेश यही हाल इस क्षेत्र के सभी होटलों का है।

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