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नई दिल्ली

चर्चा में चेहरा ::: नदी बचाने के लिए लड़ने वाली बोस्नियाई महिला को ग्रीन नोबेल अवार्ड

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 04:40 PM
चर्चा में चेहरा ::: नदी बचाने के लिए लड़ने वाली बोस्नियाई महिला को ग्रीन नोबेल अवार्ड

चर्चा में चेहरा

क्रुसिका (बोस्निया), एजेंसी

नदी बचाने के लिए बोस्निया की महिला मैदा बिलाल को वर्ष 2021 का गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार दिया गया है। इस पुरस्कार को ग्रीन नोबेल भी कहा जाता है। मैदा के अलावा पांच अन्य पर्यावरण कार्यकर्ताओं को यह पुरस्कार दिया गया है।

बोस्निया की क्रुसिका नदी को बचाने में जुटी 40 वर्षीय मैदा बिलाल की पिटाई भी की गई, उसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने गांव की महिलाओं संग नदी पर प्रस्तावित लघु जल विद्युत संयंत्र को नहीं बनने देने के लिए बिलाल ने 500 दिनों तक पहरा दिया। बिलाल ने एक समाचार एजेंसी से कहा, हमने शारीरिक रूप से 503 दिनों तक 24 घंटे नदी की रक्षा की है। अगर जरूरत पड़ी तो हम और 5,300 दिनों तक पहरा देंगे। वह बताती हैं, 2017 की गर्मियों की बात है। ग्रामीणों ने भारी मशीनों को परियोजना के निर्माण स्थल के मार्ग पर एक लकड़ी के पुल को पार करने से रोका। हमलोगों का कहना था कि जल विद्युत परियोजना पर्यावरण को बर्बाद कर देगी। इसके बाद उन्होंने पुलिस के हमले को भी सहन किया। पुलिस का कहना था कि सार्वजनिक शांति व्यवस्था का उल्लंघन करने के लिए उन्हें जबरन ले जाया गया। लेकिन वे लड़े, और डेढ़ साल बाद परमिट रद्द कर दिए जाने के बाद, पुल का नाम बदलकर महिलाओं के नाम पर रखा गया। प्रशिक्षित अर्थशास्त्री बिलाल ने कहा, मैंने अपनी नौकरी खो दी, अपने दोस्तों को खो दिया, मेरी बेटी को स्कूल में तंग किया गया। यह आसान नहीं था। फिर भी मैंने किया। मेरी एक बेटी है और मैं नहीं चाहती कि बड़ी होकर उसे अपनी मां के समान समस्या का सामना करना पड़े। मालूम हो कि बोस्निया अपनी अविरल प्रवाह वाली पहाड़ी नदियों और अछूती प्रकृति के लिए मशहूर है।

अब अन्य संयंत्रों के खिलाफ लड़ाई :

मैदा को मध्य बोस्निया में दिसंबर 2018 में इस संघर्ष में सफलता मिली। वह अभी भी बाल्कन देश में अन्य प्रस्तावित संयंत्रों के खिलाफ लड़ाई की अगुवाई कर रही हैं।

पुरस्कार समिति ने सराहा :

15 जून को ऑनलाइन आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में पुरस्कार समिति ने मैदा के कामों को सराहा। कहा, ये रोजमर्रा के नायक हमारे ग्रह की रक्षा के लिए लड़ाई में जमीनी स्तर की सक्रियता की शक्ति का प्रदर्शन करते हैं।

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