निर्यात खेप के लिए अग्रिम योजना बना रहे हैं निर्यातक
पश्चिम एशिया में संकट के कारण भारतीय निर्यातक और लॉजिस्टिक्स कंपनियां पोत परिवहन कंपनियों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। वे वैकल्पिक मार्गों की तलाश कर रही हैं और अपने भंडार में लचीलापन ला रही हैं। उद्योग संगठनों और सरकार के बीच संवाद बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि निर्यात को संभाला जा सके।

नई दिल्ली, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण निर्यात पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए निर्यातक और लॉजिस्टिक्स कंपनियां पोत परिवहन कंपनियों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं, अपनी खेप की पहले से योजना बना रही हैं और वैकल्पिक मार्गों की तलाश कर रही हैं। निर्यातकों का कहना है कि कारोबारी हालात को देखते हुए कंपनियां अपने भंडार, अनुबंध और खेप की समय-सारिणी में भी लचीलापन ला रही हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर जल्दी बदलाव किया जा सके। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, नियमित सलाह जारी करना, अतिरिक्त शुल्क को लेकर शिपिंग या माल ढुलाई वाले जहाज का परिचालन करने वाली कंपनियों से बातचीत करना, कंटेनर की उपलब्धता सुनिश्चित करना और अनुपालन की समय-सीमा में लचीलापन देना जैसे कदम इस संकट से निपटने में उद्योग के लिए मददगार हो सकते हैं।साथ
ही उन्होंने कहा कि उद्योग संगठनों और सरकार के बीच लगातार संवाद बनाए रखना भी जरूरी है। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा, हालात में फिलहाल सुधार नहीं दिख रहा है, लेकिन हम अपने निर्यात को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। पोत परिवहन कंपनियों को इस स्थिति का अनुचित फायदा नहीं उठाना चाहिए।पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति, भारत के निर्यात के लिए अनिश्चितता पैदा कर रही है। इसका असर निर्यात खेप भेजने के कार्यक्रम, लागत, बीमा प्रीमियम और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहा है। निर्यातक बदलते हालात पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि अतिरिक्त शुल्क और लंबा परिवहन समय माल की आवाजाही को प्रभावित कर रहे हैं।
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