यूरोपीय संघ ने डीपफेक को लेकर ग्रोक के खिलाफ जांच शुरू की
- ईयू ने कहा, अवैध सामग्री को रोकने के लिए एक्स ने क्या कदम उठाए

यूरोपीय संघ (ईयू) ने सोमवार को एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के एआई चैटबॉट ग्रोक के खिलाफ जांच शुरू की है। ग्रोक पर गैर सहमति वाली महिलाओं और बच्चों की अश्लील डीपफेक तस्वीरें बनाने का आरोप है। डीपफेक तस्वीरों को लेकर एआई चैटबॉट ग्रोक पहले से ही वैश्विक स्तर पर आलोचनाओं का सामना कर रहा है। कई देशों ने इस पर प्रतिबंध भी लगाया है। 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के कार्यकारी आयोग ने कहा कि वह जांच कर रहा है कि क्या एक्स ने संघ के डिजिटल नियमों के तहत पर्याप्त कदम उठाए हैं। ये नियम अवैध सामग्री के प्रसार के जोखिमों को रोकने के लिए हैं, जैसे- उकसावे वाली यौन तस्वीरें, बाल यौन शोषण सामग्री।
आयोग ने कहा कि यह जोखिम हमारे नागरिकों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं। नियामक जांचेंगे कि क्या ग्रोक डिजिटल सर्विसेज एक्ट (डीएसए) के दायित्वों का पालन कर रहा है। डीएसए इंटरनेट यूजर्स को हानिकारक सामग्री और उत्पादों से बचाने की व्यापक नियम पुस्तिका है। आयोग की कार्यकारी उपाध्यक्ष हेन्ना विरक्कुनेन ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की गैर-सहमति वाली यौन डीपफेक हिंसक और अस्वीकार्य अपमान का रूप हैं। उन्होंने कहा कि इस जांच से हम तय करेंगे कि क्या एक्स ने डीएसए के तहत अपने कानूनी दायित्वों को पूरा किया है। एक्स सभी के लिए सुरक्षित प्लेटफॉर्म बनाने के लिए प्रतिबद्ध इस मामले पर एक्स की प्रवक्ता ने पूर्व में दिए गए बयान का हवाला दिया। इसमें कहा गया था कि वह एक्स को सभी के लिए सुरक्षित प्लेटफॉर्म बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और बाल यौन शोषण, गैर-सहमति वाली अश्लील और अवांछित यौन सामग्री के प्रति शून्य सहिष्णुता रखती है। 14 जनवरी को जारी हुए इस बयान में कहा गया था कि कंपनी यूजर्स को बिकिनी, अंडरवियर या अन्य खुली पोशाक में लोगों को दिखाने की अनुमति नहीं देगी लेकिन केवल उन जगहों पर जहां यह अवैध है।

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