आम आदमी की जेब तक पहुंचा पश्चिम एशिया संकट
शोल्डर ::: दूध, खाद्य तेल, सूखे मावा, चायपत्ति से लेकर साबून तक के दामों में

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते पैदा हुआ ऊर्जा संकट अब आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है। खासकर आम जरूरत की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे है। अकेले दूध नहीं, बीते दो महीने के दौरान कंपनियों ने खाद्य तेल, मसाले, सूखे मेवे, चायपत्ती, साबून, शैंपू से लेकर अन्य वस्तुओं के दामों में 10-30 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है।
मूल्य वृद्धि की प्रक्रिया
कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर स्मार्ट तरीका अपनाया है। पहले उत्पादों की मात्रा को कम किया और अब धीरे से कीमतों को बढ़ा दिया है। मार्च के अंत तक एक ब्रांडेड कंपनी का एक किलोग्राम की चायपत्ती का पैकेट 500 रुपये का था, जिसकी कीमत अप्रैल में बढ़ाकर 515 रुपये कर दी गई। अब वह अधिकांश स्टोर व ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर 539 से लेकर 545 रुपये के बीच बेचा जा रहा है।
खाद्य तेल के दाम भी उछले
अकेले चायपत्ति नहीं खाद्य तेल की कीमतों में बीते दो महीने में करीब 30 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो गई है। अगर किसी कंपनी ने कीमतों में कम बढ़ोतरी की है तो उन्होंने बोतल का आकार कम कर दिया है। खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ोतरी 10-20 प्रतिशत के बीच रही है, जिसमें आने वाले दिनों में अधिक तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि भारत अपने जरूरत का 60 फीसदी से अधिक खाद्य तेल आयात करता है।
और बढ़ सकते हैं दाम
आंकड़ों के अनुसार भारत करीब 16 मिलियन टन खाद्य तेल के आयात पर प्रति वर्ष लगभग 1.61 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। अब डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी के चलते खाद्य तेल की खरीद पर विदेश मुद्रा भंडार से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ेगी, जिससे खाद्य तेल पहले से अधिक महंगा होगा।
अन्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी
उत्पाद बढ़ोतरी प्रतिशत में
मसाले 10-15
हेयर ऑयल 7-10
टूथपेस्ट 5-7
सूखे मेवे 15-25
साबून 4-8
शैंपू 4-6
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पैकेजिंग सामग्री के दाम भी उछले
पैकेजिंग सामग्री की वृद्धि
फरवरी बाद से प्लास्टिक दाने की कीमतों में 30-70 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। पीपी और पीई ग्रेड के दाने की कीमतें बीते ढाई महीनों में दो से चार हजार रुपये प्रति टन तक बढ़ी हैं। इससे पैकेजिंग सामग्री की औसत कीमतों पर भी 20-30 फीसदी तक असर पड़ा है। कई मामलों में यह बढ़ोतरी 40 फीसदी तक की हुई है। इसके साथ ही, टिन और मेटल कंटेनर पैकेजिंग भी 5-15 फीसदी तक महंगी हुई है। वहीं, कांच की बोतलों के दाम भी 15 फीसदी तक बढ़े है। इन सब का असर एफएमसीजी कंपनियों के खर्च पर पड़ा है। सामान्य तौर पर माना जाता है कि साबुन, शैंपू, तेल, बिस्किट, पानी की बोतल बेचने वाली कंपनियों के कुल खर्च का करीब 20 प्रतिशत पैकेजिंग पर होता है।
महंगाई का भविष्य
आगे भी जारी रहेगा महंगाई का असर
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि मई में थोक महंगाई और बढ़कर नौ प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि ऊंची ऊर्जा कीमतों का असर धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र पर दिखाई देगा।, वहीं बजाज ब्रोकिंग के विश्लेषक शाश्वत सिंह के अनुसार, बढ़ती माल ढुलाई लागत और जिंस कीमतों का असर अब थोक महंगाई में दिखने लगा है और आने वाले महीनों में इसका असर उपभोक्ता महंगाई पर भी पड़ सकता है। बार्कलेज का अनुमान है कि मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब पांच रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
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