‘महिलाओं को डर पर काबू पाना होगा’
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहटकर ने कहा कि महिलाओं का सच्चा सशक्तीकरण भय, आत्मसंदेह और सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने से शुरू होता है। उन्होंने भारतीय सभ्यता में महिलाओं को शक्ति और सृजन के प्रतीक के रूप में पहचानने पर जोर दिया और कहा कि समाज ने उन्हें ज्ञान और खुशहाली का आधार माना है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के अध्यक्ष विजया किशोर राहटकर ने शनिवार को कहा कि महिलाओं का सच्चा सशक्तीकरण भय, आत्मसंदेह और लंबे समय से चली आ रही सामाजिक रूढ़ियों द्वारा निर्मित मानसिक बाधाओं को तोड़ने से शुरू होता है। यहां विज्ञान भवन में महिला विचारकों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए, राहटकर ने कहा कि भारतीय सभ्यता ने परंपरागत रूप से महिलाओं को केवल व्यक्तियों या सामाजिक भूमिकाओं के रूप में नहीं, बल्कि शक्ति, सृजन और चेतना के प्रतीक के रूप में देखा है। देवी सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के सांस्कृतिक प्रतीकवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने ऐतिहासिक रूप से महिलाओं को ज्ञान, खुशहाली और ताकत की नींव के रूप में पहचाना है, न कि उन्हें परिवार के दायरे तक सीमित रखा है।
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