
प्रेम, स्मृति, बिछोह और अपने समय की कहानी है ‘एक लम्हा जिंदगी’
भारत रंग महोत्सव में 'एक लम्हा जिंदगी: एक प्रेम कहानी' नाटक ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया। जूही बब्बर ने रजिया का किरदार निभाया, जिसमें उन्होंने प्रेम, बिछोह और समय का प्रवाह दर्शाया। नाटक का निर्देशन मकरंद देशपांडे और जूही बब्बर ने किया है।
अभिनव उपाध्याय नई दिल्ली। भारत रंग महोत्सव (भारंगम) में शनिवार को श्रीराम सेंटर फॉर परफार्मिंग आर्ट के खचाखच भरे सभागार में नाटक ‘एक लम्हा जिंदगी : एक प्रेम कहानी (1938–1979)’ का असर दर्शकों पर देखने को मिला। नाटक की समाप्ति के बाद दर्शक देर तक तालियां बजाते रहे। जूही बब्बर ने इस नाटक में रजिया का किरदार निभाया है। इसमें उन्होंने बेहतरीन एकल अभिनय के माध्यम से प्रस्तुति दी। यह एक भावनात्मक नाट्य प्रस्तुति है, जो प्रेम, स्मृति, बिछोह और समय के प्रवाह को केंद्र में रखकर रची गई है। यह नाटक मुख्यतः 1938 से 1979 के बीच फैली एक प्रेम कहानी को मंच पर जीवंत करता है।
कहानी दो व्यक्तियों के रिश्ते के माध्यम से उस दौर के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तनों, मानवीय संवेदनाओं और जीवन की अनिश्चितताओं को दर्शाती है, जिसमें प्रेम केवल रोमांटिक भाव नहीं बल्कि संघर्ष, इंतजार, त्याग और यादों की स्थायी शक्ति के रूप में सामने आता है। जूही बब्बर की प्रस्तुति इस नाटक की खास पहचान मानी जाती है। वे अपने एकल अभिनय (मोनोलॉग शैली) के जरिए कई भावनात्मक परतों खुशी, दर्द, उम्मीद और अकेलेपन को दर्शकों तक पहुंचाती हैं। मंचन में शब्दों की संवेदनशीलता, संगीत और स्मृतियों का ताना-बाना मिलकर एक काव्यात्मक वातावरण रचते हैं, जिससे दर्शक बीते समय की यात्रा का अनुभव करते हैं। समग्र रूप से यह नाटक प्रेम की उस शाश्वत भावना को उजागर करता है जो समय, दूरी और परिस्थितियों से परे होकर भी मनुष्य के जीवन को अर्थ देती है। इस नाटक के बारे में जूही बब्बर कहती हैं कि एक अभिनेत्री को अपनी नानी का चरित्र निभाने का अवसर कितनी बार मिलता है। मैं अपने नाना-नानी की प्रेम कहानी में अपनी नानी का चरित्र निभा रही हूं। मैं अपने माता-पिता, राज बब्बर और नादिरा बब्बर की बहुत आभारी हूं, जिन्होंने मुझे ऐसी परवरिश दी जिससे मैं देशभक्ति का अर्थ और शांति, सद्भाव और इंसानियत के महत्व को समझ पाई। यह मेरे नाना-नानी की कहानी है, जिसकी अपील सार्वभौमिक है। इसकी प्रासंगिकता पीढ़ियों तक व्याप्त है, जो आज़ादी से पहले और बाद के वर्षों में जीने वालों के साथ-साथ आज की पीढ़ी से भी जुड़ती है। मंच पर रज़िया का चरित्र निभाना मेरे जीवन का सबसे शानदार अनुभव रहा है। एकजुट थिएटर मुंबई के इस नाटक का निर्देशन प्रसिद्ध अभिनेता व रंगकर्मी मकरंद देशपांडे और जूही बब्बर ने किया। जबकि इसकी लेखक नादिरा ज़हीर बब्बर, नूर ज़हीर और जूही बब्बर सोनी हैं।

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