चुनावी ट्रस्टों को चंदे का 82 फीसदी हिस्सा भाजपा को मिला: एडीआर

Feb 13, 2026 07:30 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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वित्तीय वर्ष 2024-25 में चुनावी ट्रस्टों को कुल 3826.34 करोड़ रुपये चंदे के रूप में मिले, जिसमें भाजपा को 82.52 प्रतिशत राशि मिली। एडीआर की रिपोर्ट में अनियमितताओं का जिक्र है, जिसमें कुछ ट्रस्टों ने अधिक राशि वितरित की। महाराष्ट्र चंदे का सबसे बड़ा स्रोत रहा। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉंड योजना को असंवैधानिक घोषित किया।

चुनावी ट्रस्टों को चंदे का 82 फीसदी हिस्सा भाजपा को मिला: एडीआर

2024-25 में चुनावी ट्रस्टों को 3826 करोड़ रुपये का चंदा मिला कुछ ट्रस्टों ने चंदे में मिले पैसों से ज्यादा वितरित किए नई दिल्ली, एजेंसी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में चुनावी ट्रस्टों को कुल 3826.34 करोड़ रुपये चंदे के तौर पर प्राप्त हुए, इनमें से 3826.35 करोड़ रुपये विभिन्न राजनीतिक दलों को बांटे गए। इस कुल राशि का 82 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को प्राप्त हुआ है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। चुनाव आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर जारी रिपोर्ट में एडीआर ने कहा कि 20 पंजीकृत चुनावी ट्रस्टों में से 10 ने इस वित्तीय वर्ष के दौरान चंदा प्राप्त करने की घोषणा की है।

वहीं, पांच ट्रस्टों की रिपोर्ट समय सीमा बीतने के तीन महीने बाद भी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थी। नियम के अनुसार, चुनावी ट्रस्टों को एक वर्ष में प्राप्त कुल चंदे का कम से कम 95 प्रतिशत हिस्सा बांटना अनिवार्य होता है। किस पार्टी को कितना मिला? भाजपा 3157.65 करोड़ रुपये(82.52 प्रतिशत) कांग्रेस 298.77 करोड़ रुपये (7.81 प्रतिशत) टीएमसी 102 करोड़ रुपये (2.67 प्रतिशत) अन्य 19 पार्टियों को मिलाकर कुल 267.91 करोड़ रुपये मिले 228 कॉर्पोरेट घरानों ने 3636.81 करोड़ रुपये दान किया 'प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट' ने 15 पार्टियों को सर्वाधिक 2668.46 करोड़ रुपये बांटे। इसके बाद 'प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट' ने 10 पार्टियों को 914.97 करोड़ रुपये दिए। एडीआर ने कहा कि कुल 228 कॉर्पोरेट घरानों ने 3636.81 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जबकि 99 व्यक्तियों ने 187.62 करोड़ रुपये दान किए। सबसे बड़े दानदाताओं में 'एलिवेटेड एवेन्यू रियल्टी एलएलपी' (500 करोड़ रुपये) शीर्ष पर रही, जिसके बाद टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड (308.13 करोड़ रुपये) और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (217.62 करोड़ रुपये) का स्थान रहा। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की सबसे अधिक हिस्सेदारी रिपोर्ट के अनुसार चंदे में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक (27.78 प्रतिशत) रही, उसके बाद रियल एस्टेट (16.44 प्रतिशत) का नंबर रहा। राज्यों में महाराष्ट्र 1,225.42 करोड़ रुपये के साथ चंदे का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा, जिसके बाद तेलंगाना, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और गुजरात रहे। पारदर्शिता पर सवाल एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में अनुपालन संबंधी चिंताओं को भी उजागर किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 1,065.20 करोड़ रुपये के चंदे के लिए दानदाताओं के पते का खुलासा नहीं किया गया। साथ ही, कुछ ट्रस्टों ने मिले हुए चंदे से अधिक राशि वितरित की। हार्मनी इलेक्टोरल ट्रस्ट को 35.55 करोड़ रुपये मिले, लेकिन उसने 35.65 करोड़ रुपये बांटे, जो साल के दौरान मिले पैसों से 10 लाख रुपये ज्यादा है। एडीआर ने राजनीतिक चंदे में अधिक पारदर्शिता की सिफारिश करते हुए कहा कि नियमों का पालन न करने वाले ट्रस्टों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था।

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