Election Commission Defends Special Voter List Revision in Bihar Amid Opposition Allegations वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप निराधार: आयोग, Delhi Hindi News - Hindustan
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वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप निराधार: आयोग

85 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रमुख बातें - चुनाव आयोग मतदाताओं के साथ चट्टान की तरह खड़ा है।- एक झूठ को बार-बार दोहराए जाने से वह सच नहीं हो जा

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्लीSun, 17 Aug 2025 08:23 PM
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वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप निराधार: आयोग

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ महागठबंधन की मतदाता अधिकार यात्रा के बीच निर्वाचन आयोग ने एसआईआर कराने के अपने फैसले और प्रक्रिया को सही ठहराया है। आयोग ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बगैर मतदाता सूची में गड़बड़ी समेत उनके सभी आरोपों को खारिज कर दिया। साथ ही कहा कि राहुल गांधी को सात दिन में हलफनामा देना होगा या देश से माफी मांगनी होगी। तीसरा कोई विकल्प नहीं है। एसआईआर और वोट चोरी को लेकर कई दिनों से निर्वाचन आयोग और विपक्ष में चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार अपने दोनों सहयोगी डॉ. सुखविंदर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी के साथ मीडिया से रूबरू हुए।

85 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीईसी ने पूरी तफ्सील के साथ अपनी बात रखते हुए कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूचियों में सभी त्रुटियों को दूर करना है। सूची सही करना आयोग की जिम्मेदारी विपक्ष की तरफ से लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए सीईसी ने कहा कि बिहार में एसआईआर को सफल बनाने के लिए सभी हितधारक पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं। एसआईआर में जल्दबाजी के आरोपों को निराधार बताते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा कि हर चुनाव से पहले मतदाता सूची को सही करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। आयोग अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। 15 दिन में आपत्ति दर्ज कराने की अपील बिहार में कुछ दल और उनके नेता द्वारा एसआईआर को लेकर गलत सूचना फैलाने पर चिंता जताते हुए ज्ञानेश कुमार ने सभी राजनीतिक दलों से मसौदा मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अभी 15 दिन बाकी है, आयोग के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। बूथ स्तर के अधिकारी और एजेंट पूरी पारदर्शी तरीके से मिलकर काम कर रहे हैं। ‘वोट चोरी शब्द संविधान का अपमान सीईसी ज्ञानेश कुमार ने दावा किया कि उनकी नजर में पक्ष और विपक्ष सब बराबर है। आयोग राजनीतिक दलों के बीच कोई भेदभाव नहीं करता है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव याचिकाएं 45 दिन के भीतर दायर नहीं की जातीं और उसके बाद ‘वोट चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह करने का नाकाम प्रयास किया जाता है, तो यह भारतीय संविधान का अपमान है। सबूत मांगा गया, पर जवाब नहीं दिया राहुल गांधी के कुछ मतदाताओं के दोहरे मतदान करने के आरोप के बारे में सीईसी ने कहा कि कुछ मतदाताओं के दोहरे मतदान का आरोप लगाया, पर जब सबूत मांगा गया तो कोई जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही कोई मतदाता ऐसे झूठे आरोपों से डरता है। आयोग यह स्पष्ट करना चाहता है कि निर्वाचन आयोग बिना किसी भेदभाव के गरीब, अमीर, बुजुर्ग, महिलाओं, युवाओं सहित सभी वर्गों और सभी धर्मों के साथ चट्टान की तरह खड़ा है। राहुल से शपथ पत्र क्यों चुनाव आयुक्त ने कहा कि अगर शिकायतकर्ता उस निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं, तो उसके पास कानून में केवल एक ही विकल्प है। निर्वाचक पंजीकरण के नियम संख्या 20, उप-खंड (3), उप-खंड (ई) यह कहता है कि यदि आप उस निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं, तो आप गवाह के रूप में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आपको निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी को शपथ देनी होगी। वह शपथ उस व्यक्ति के सामने दिलानी होगी जिसके खिलाफ आपने शिकायत की है। कोई वोट नहीं चुरा सकता ज्ञानेश कुमार ने कहा कि लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया में एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारी, दस लाख से ज्यादा बूथ लेवल एजेंट, उम्मीदवारों के 20 लाख से ज्यादा पोलिंग एजेंट काम करते हैं। इतने सारे लोगों के सामने इतनी पारदर्शी प्रक्रिया में क्या कोई मतदाता वोट चुरा सकता है। बिना अनुमति के तस्वीर दिखाई सीईसी कुमार ने कहा कि कुछ दिन पहले हम सबने देखा कि कई मतदाताओं की तस्वीरें बिना उनकी अनुमति के मीडिया के सामने पेश की गईं। उन पर आरोप लगाए गए। क्या चुनाव आयोग को किसी भी मतदाता, चाहे वह उनकी मां हो, बहू हो, बेटी हो, के सीसीटीवी वीडियो साझा करने चाहिए? जिनके नाम मतदाता सूची में हैं, सिर्फ वह मतदाता ही अपना उम्मीदवार चुनने के लिए वोट डालते हैं। राहुल गांधी पर गलत पीपीटी दिखाने और विश्लेषण करने के आरोप ज्ञानेश कुमार ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर गलत पीपीटी दिखाने और आंकड़ों का गलत विश्लेषण करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि गलत पीपीटी तैयार किए गए और उनका गलत विश्लेषण किया गया। मतदाता सूची में नाम होने से मतदान गलत नहीं होता है। मतदाता सूची में नाम और मतदान दोनों अलग-अलग हैं। सात दिन का अल्टीमेटम: सीईसी ने राहुल गांधी को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी अपने आरोपों के लिए सात दिन के अंदर हलफनामा नहीं देते हैं, तो उन्हें देश से माफी मांगनी होगी। इसके अलावा उनके पास कोई तीसरा विकल्प नहीं है। सात दिन में हलफनामा नहीं मिलता है, तो इसका मतलब यह होगा कि उनकी तरफ से लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। महाराष्ट्र में वोट कैसे बढ़े सीईसी ज्ञानेश कुमार ने महाराष्ट्र में अचानक वोट बढ़ने के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि जब ड्राफ्ट सूची दी गई थी, तो उस वक्त आपत्तियां क्यों दर्ज नहीं की गईं। आज तक महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास सबूत के साथ एक भी मतदाता का नाम नहीं भेजा गया है। पांच बजे के बाद अधिक मतदान कैसे ज्ञानेश कुमार ने कहा कि यह भी सवाल पूछा गया कि आखिर आखिरी एक घंटे में इतनी ज्यादा वोटिंग कैसे हुई। उन्होंने कहा कि अगर 10 घंटे मतदान चलता है, तो औसतन हर घंटे 10 फीसदी मतदान होना चाहिए। आप किसी बात को 10 बार या 20 बार कहें, तो वह सच नहीं हो जाती। सूरज हमेशा पूरब से ही उगता है, पश्चिम से नहीं उग सकता। सपा और बीजेडी ने कोई हलफनामा नहीं दिया सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्वाचन आयोग को वोट चोरी के 18 हजार शपथ पत्रों और बीजेडी की शिकायत के बारे में सवाल किए जाने पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि कोई हलफनामा नहीं दिया गया है। सिर्फ पत्र लिखा गया है। ----------------------------------------------- सवाल-जवाब राहुल गांधी के सवाल : चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक डेटा क्यों नहीं देता। जानबूझकर ऐसी मतदाता सूची देता है, जिसे मशीन से नहीं पढ़ा जा सके? आयोग का जवाब: जहां तक मशीन-पठनीय वोटर लिस्ट का सवाल है तो सुप्रीम कोर्ट 2019 में ही कह चुका है कि यह मतदाता की निजता का उल्लंघन हो सकता है। मशीन पठनीय सूची देने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। आरोप गलत है। आयोग का यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद और 2019 का है। हमें मशीन-पठनीय मतदाता सूची और खोज योग्य मतदाता सूची के बीच के अंतर को समझना होगा। आप आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध मतदाता सूची को ईपीआईसी नंबर डालकर खोज सकते हैं। इसे डाउनलोड भी कर सकते हैं। इसे मशीन-पठनीय नहीं कहा जाता। राहुल गांधी के सवाल: कई मतदाताओं के नाम के आगे उनका पता ‘जीरो लिखा गया। आयोग का जवाब: मकान नंबर जीरो होने का मतलब फर्जी मतदाता नहीं है। आयोग ने कहा कि देश में ऐसे करोड़ों मतदाता हैं, जिनके पते में जीरो नंबर है। हर पंचायत में मकान नंबर नहीं होता है। वोटर बनने के लिए मकान होना जरूरी नहीं होता। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा कि तमाम मतदाता हैं जो सड़कों पर सोते हैं। इन सभी के पते में मकान नंबर जीरो ही हैं। राहुल गांधी के सवाल: आयोग सीसीटीवी फुटेज नहीं देता, ताकि कोई सबूत न बचे। आयोग का जवाब: रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से नतीजे घोषित करने के बाद भी कानून में यह प्रावधान है कि 45 दिनों के भीतर राजनीतिक दल कोर्ट जाकर चुनाव को चुनौती देने के लिए चुनाव याचिका दायर कर सकते हैं। इस 45 दिनों की अवधि के बाद इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाना, चाहे वह केरल हो, कर्नाटक हो या बिहार गलत है। 45 दिन तक किसी भी उम्मीदवार या राजनीतिक दल को कोई अनियमितता नहीं मिलती है। आज इतने दिनों बाद देश के मतदाता और जनता ऐसे बेबुनियाद आरोप लगाने के पीछे की मंशा समझ रहे हैं। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा, हमने कुछ दिन पहले देखा कि कई मतदाताओं की तस्वीरें बिना उनकी अनुमति के मीडिया के सामने पेश की गईं। उन पर आरोप लगाए गए, उनका इस्तेमाल किया गया। क्या आयोग को किसी भी मतदाता, चाहे वह उनकी मां हो, बहू हो, बेटी हो, उनके सीसीटीवी वीडियो साझा करने चाहिए? राहुल गांधी के सवाल: एक ही आदमी कई जगह मतदान कर रहा है। यह आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत है। आयोग का जवाब: सीईसी ने दोहरे मतदान और ‘वोट चोरी के आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। भारत के संविधान के अनुसार, केवल भारतीय नागरिक ही सांसद और विधायक के चुनाव में मतदान कर सकते हैं। अन्य देशों के लोगों को यह अधिकार नहीं है। सवाल: दो एपिक नंबर कैसे? आयोग का जवाब: दो एपिक वाले मतदाता कार्ड पर सीईसी कुमार ने कहा, डुप्लिकेट एपिक दो तरह से हो सकते हैं। एक तो ये कि एक व्यक्ति जो पश्चिम बंगाल में है, जो अलग व्यक्ति है, उसके पास एक एपिक नंबर है और दूसरा व्यक्ति जो हरियाणा में है, उसके पास वही एपिक नंबर है। मार्च 2025 के आसपास जब ये सवाल आया तो हमने इस पर चर्चा की और हमने देशभर में इसका समाधान किया। लगभग तीन लाख ऐसे लोग मिले, जिनके एपिक नंबर एक जैसे थे, इसलिए उनके एपिक नंबर बदल दिए गए। दूसरे तरह का डुप्लिकेशन तब आता है, जब एक ही व्यक्ति का नाम एक से ज्यादा जगहों पर वोटर लिस्ट में होता है और उसका एपिक नंबर अलग-अलग होता है।

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