मिशन इंजीनियरिंग :::परीक्षा में सफलता के लिए शरीरिक-मानसिक स्वास्थ्य व उचित रणनीति जरूरी

Jan 20, 2026 04:22 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ जाता है। मनोविज्ञानी साक्षी मंध्यान ने संतुलित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, और श्वास तकनीकों के बारे में बताया। उन्होंने पोमोडोरो तकनीक, नोट्स हाथ से लिखने, और सामाजिक दबाव से निपटने के सुझाव दिए। परीक्षा की तैयारी प्राथमिकताओं को संतुलित करने का नाम है।

 मिशन इंजीनियरिंग :::परीक्षा में सफलता के लिए शरीरिक-मानसिक स्वास्थ्य व उचित रणनीति जरूरी

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। परीक्षा के दिनों में विद्यार्थियों पर पढ़ाई का दबाव अधिक होता है। समय की कमी और बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षाएं मानसिक तनाव बढ़ा देती हैं। ऐसे समय में सही रणनीति और संतुलित दिनचर्या सफलता की कुंजी बन सकती है। मनोविज्ञानी एवं हेप्पीनेस कोच साक्षी मंध्यान ने चार मंत्र बताते हुए विद्यार्थियों को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, रणनीतिक अध्ययन और वातावरण प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। साक्षी मंध्यान ने पर्याप्त नींद को सबसे जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि नींद मूलभूत जरूरत है। जब दिमाग को पूरा आराम मिलता है, तभी वह जानकारी को सही तरीके से समझ और याद रख पाता है।

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साथ ही सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को पढ़ाई से पहले हल्का भोजन और अध्ययन के बाद भरपेट भोजन करके सोना चाहिए। इससे स्मरण शक्ति बेहतर होती है। पढ़ाई की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्होंने पोमोडोरो तकनीक अपनाने की सिफारिश की। इस तकनीक में 25 मिनट एकाग्र होकर पढ़ाई करने के बाद पांच मिनट का ब्रेक लिया जाता है। ब्रेक के दौरान पर्स लिप ब्रीदिंग और बेली ब्रीदिंग जैसी श्वास तकनीकों का अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि जब सांस छोड़ने की अवधि, सांस लेने से अधिक लंबी होती है तो मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है। मानसिक तनाव कम करने के लिए ग्राउंडिंग तकनीक को भी प्रभावी बताया गया। इसमें पांच इंद्रियों का उपयोग कर आसपास की गतिविधियां को महसूस किया जाता है। साक्षी मंध्यान ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को नोट्स हाथ से लिखने और विषय को जोर से पढ़ना चाहिए। इससे श्रवण प्रणाली और प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (मस्तिष्क का आगे का भाग) सक्रिय होता है, जिससे जानकारी लंबे समय तक याद रहती है। सामाजिक दबाव से निपटने के लिए उन्होंने दूसरों से तुलना करने से बचने की सलाह दी। इतना जरूर कहा कि केवल अपने पिछले प्रदर्शन से तुलना करें और सकारात्मक आत्म मंथन कर कमियों को दूर करें। दैनिक समय-सारणी बनाकर उसमें अपनी ऊर्जा के अनुसार बदलाव करने और मनोरंजन के लिए भी समय निकालने की बात कही। उनके अनुसार, परीक्षा की तैयारी प्राथमिकताओं को संतुलित करने का नाम है। -----

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