यूरोपीय अदालत ने नीरव मोदी का मामला गोपनीय रखा
फ्रांस के स्ट्रासबर्ग स्थित यूरोपीय मानवाधिकार अदालत ने भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की पहचान को गोपनीय रखने की अनुमति दी। इससे उनकी याचिका का मामला सार्वजनिक जांच से बाहर हो गया। यदि उनकी याचिका खारिज होती है, तो ब्रिटेन से भारत में प्रत्यर्पण की अंतिम कानूनी बाधा समाप्त हो जाएगी।

फ्रांस के स्ट्रासबर्ग स्थित यूरोपीय मानवाधिकार अदालत (ईसीएचआर) ने भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की पहचान को गोपनीय रखने की अनुमति दे दी, जिससे उसका मामला सार्वजनिक जांच से बाहर हो गया। अधिकारियों ने बताया कि अदालत उनके मामले को गोपनीय मानेगा और मामले की कार्यवाही खुली अदालत में नहीं होगी। ईसीएचआर कार्यालय ने बताया कि जिन मामलों में आवेदक को पहचान गोपनीय रखने का अधिकार दिया गया और मुकदमे से जुड़ी फाइल गोपनीय है, उन मामलों के बारे में अदालत कोई जानकारी नहीं दे सकती। लगभग दो सप्ताह में ईसीएचआर नीरव मोदी की याचिका पर सुनवाई कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, न्यायालय सीबीआई की भी सुनवाई करेगा, जिसके बाद वह फैसला सुना सकता है।
यदि मोदी की याचिका खारिज हो जाती है, तो ब्रिटेन से भारत में उसके प्रत्यर्पण की अंतिम कानूनी बाधा दूर हो जाएगी। वह फिलहाल लंदन की जेल में बंद है।ब्रिटेन में नीरव के सभी कानूनी रास्ते बंदमार्च में ब्रिटेन के 'हाईकोर्ट ऑफ जस्टिस' ने मोदी की प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका पर फिर से सुनवाई की अपील खारिज कर दी थी। इससे ब्रिटेन में नीरव मोदी के लिए सभी कानूनी रास्ते बंद हो गए। इसके बाद उसने यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ईसीएचआर) का रुख किया। ब्रिटेन मानवाधिकारों पर यूरोपीय संधि का हस्ताक्षरकर्ता देश है।
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