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नशे में कार से उड़ाया डीसीपी कार्यालय का बोर्ड, चालक दोषी करार

नशे में कार से उड़ाया डीसीपी कार्यालय का बोर्ड, चालक दोषी करार

संक्षेप:

नई दिल्ली में शराब के नशे में तेज रफ्तार कार चलाकर डीसीपी कार्यालय के बोर्ड को उड़ाने के मामले में रोहिणी कोर्ट ने आकाश को दोषी ठहराया। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही का मामला बताया और आरोपी को आईपीसी की धाराओं के तहत सजा दी। मेडिकल जांच में शराब पीने की पुष्टि हुई थी।

Jan 10, 2026 07:11 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। शराब के नशे में तेज रफ्तार कार चलाकर जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) कार्यालय के बाहर लगे बोर्ड को उड़ाने के मामले में रोहिणी कोर्ट ने आरोपी चालक आकाश को दोषी ठहराया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी संयम जैन की अदालत ने कहा कि यह महज दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का मामला है। अदालत ने कहा कि यदि बोर्ड की जगह कोई व्यक्ति होता तो यह हादसा गंभीर हो सकता था। अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 279 (लापरवाही से वाहन चलाने), 427 (सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने) और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 (नशे में वाहन चलाना) के तहत दोषी ठहराया है।

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यह मामला 11 नवंबर 2022 की देर रात का है। आरोपी आकाश अपनी सेंट्रो कार से अंबेडकर अस्पताल की ओर से आ रहा था। रोहिणी के सेक्टर-पांच स्थित डीसीपी कार्यालय के सामने उसकी कार जिग-जैग तरीके से तेज गति से चल रही थी। इसी दौरान कार सीधे डीसीपी कार्यालय के साइनबोर्ड से टकरा गई, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। उस समय कार्यालय के गेट पर तैनात संतरी हेड कांस्टेबल निर्मल सिंह ने चालक के मुंह से शराब की गंध महसूस की और तुरंत पुलिस को सूचना दी। जांच में हुई नशे में होने की पुष्टि पुलिस आरोपी को बीएसए अस्पताल ले गई, जहां मेडिकल जांच में शराब पीने की पुष्टि हुई। अदालत ने माना कि भले ही ब्रेथ एनालाइजर की प्रिंट स्लिप उपलब्ध नहीं हो सकी, लेकिन मेडिकल लीगल रिपोर्ट और गवाहों की गवाही से यह स्पष्ट है कि आरोपी नशे की हालत में वाहन चला रहा था। वाहन की मैकेनिकल जांच में भी सामने आया कि हादसे के बाद कार का फ्रंट एक्सल क्षतिग्रस्त हो गया था और वह सड़क पर चलने योग्य नहीं थी। अदालत ने आरोपी के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उसने किसी नशे में धुत राहगीर को बचाने के लिए वाहन मोड़ा था। कोर्ट ने कहा कि मौके पर ऐसे किसी व्यक्ति की मौजूदगी का कोई सबूत नहीं मिला।