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ड्रोन तकनीक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लाएंगे

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ड्रोन तकनीक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लाएंगे
हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीSat, 28 May 2022 06:20 PM
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मुरादाबाद और इलाहाबाद के विशेष ध्यानार्थ::::::::::::::

शोल्डर:: ड्रोन महोत्सव में युवा इंजीनियरों ने जताई उम्मीद, रक्षा, डिलीवरी सिस्टम और कृषि क्षेत्र में तकनीकी की जरूरत

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता।

देश में ड्रोन और उससे जुड़ी तकनीकी अब युवाओं की नवीन खोज और हुनर के रास्ते अपना सफर तय करेगी। प्रगति मैदान में चल रहे भारत ड्रोन महोत्सव -2022 से 80 फीसदी वो कंपनियां हैं, जिन्हें युवाओं ने अपने दम पर खड़ा किया है या फिर कंपनियां से जुड़कर भविष्य के ड्रोन तैयार कर रहे हैं। इनमें आईआईटीयंस से लेकर विदेशों में अच्छे पैकेज छोड़कर लौटे युवा भी शामिल हैं। इन सबमें मुरादाबाद की श्रेया रस्तोगी का नाम सबसे पहले है जो नासा की नौकरी छोड़कर आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश में उड़ने वाले टैक्सी चलाने की दिशा में प्रयासरत हैं। इनकी कंपनी ने अपनी टैक्सी को प्रस्तुत किया है।

तीन साल में टैक्सी उड़ाने का लक्ष्य

भारत की ईप्लेन कंपनी ने भी फ्लाइंग टैक्सी को प्रदर्शित किया है जो इलेक्ट्रिक टैक्सी है। दो सीट वाली इस टैक्सी को मुरादाबाद सिविल लाइन निवासी श्रेया रस्तोगी और उनकी टीम ने तैयार किया है। ई-200 टैक्सी को अगले तीन वर्ष में देश में बड़े स्तर पर संचालन की तैयारी है। इसका ट्रायल अगले वर्ष करने की तैयारी है। श्रेया ने कहा कि उनकी कंपनी की टैक्सी 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम गति के साथ उड़ान भर सकती है और एक बार चार्ज होने के बाद 200 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। वर्तमान में कंपनी ने पांच मीटर लंबी और पांच मीटर चौड़ाई वाली टैक्सी को तैयार किया है। लेकिन कंपनी दूसरी टैक्सी पर भी काम कर रही है जो तीन मीटर चौड़ाई और तीन मीटर लंबाई वाली होगी। श्रेया कहती है कि देश के अंदर जैसे ही उड़ने वाली टैक्सी बढ़ेंगी तो इनकी सफलता के साथ पायलट की जरूरत भी बढ़ेगी। इसे टैक्सी और पायलट की जरूरत होगी जो देश के युवा पूरी करेंगे।

भविष्य सुनहरा

श्रेया ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से मैकेनिकल और एयरोस्पेस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उसके बाद दो वर्ष तक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में काम किया। वह स्पेससूट तैयार करने वाली टीम की सदस्य थीं। श्रेया का मानना है कि आज दुनियाभर को ‘हिन्दुस्तान के युवा नवीन तकनीक बनाकर दे रहे हैं। लेकिन जैसे ही उन्हें देश में व्यापक संभावनाएं दिखेंगी तो वो भी वतन लौटकर अपनी सेवाएं जरूर देंगे। उनका मानना है कि ड्रोन और उड़ने वाली टैक्सी को लेकर सरकार काफी संजीदा है। देश में ड्रोन और फ्लाइंग टैक्सी का भविष्य सुनहरा है।

आईआईटी के दिनेश बना रहे सस्ता ड्रोन

आईआईटी मुंबई से निकले दिनेश सैन हल्के और सबसे सस्ते ड्रोन बना रहे हैं। इनकी कंपनी सात हजार से लेकर 14 हजार रुपये की कीमत के छोटे ड्रोन तैयार करती है। इनका उपयोग मुख्य रूप से ड्रोन से जुड़ा प्रशिक्षण देने में काम आता है। उनकी कंपनी ड्रोना एविएशन नीति आयोग के साथ मिलकर अटल टिंकरिंग लैब को ड्रोन उपलब्ध करा रही है, जहां युवाओं को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही आर्मी पब्लिक स्कूल और अन्य शिक्षण संस्थान भी उनके ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनकी कंपनी द्वारा तैयार ड्रोन एक बार में आठ से 10 मिनट तक उड़ान भरता है। दिनेश सैन कहते हैं कि देश में अब ड्रोन उद्योग तेजी से विकसित होगा, जिसमें प्रशिक्षित और नवीन खोज करने वाले युवाओं की आवश्यकता होगी। क्योंकि ड्रोन का इस्तेमाल रक्षा क्षेत्र में सर्विलांस के साथ ही हमले करने के लिए भी तेजी से होगा। इसके साथ ही सामान की डिलीवरी और किसी भी प्रोजेक्ट के लिए मैपिंग करने तक में ड्रोन की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। इसलिए ड्रोन प्रशिक्षण में मेरी कंपनी के उत्पाद खासे पसंद किए जा रहे हैं।

सामान और दवा आपूर्ति में होगा इस्तेमाल

मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी इलाहाबाद से इंजीनियरिंग करने वाले किशन तिवारी और उनके साथ रिमांशु पांडेय की कंपनी टेक्नोलॉजी इन स्पेस एंड एरो वर्क भी महोत्सव में हिस्सा ले रही है। किशन तिवारी कहते हैं कि हमनें इंजीनियरिंग के बाद 2019 में ही कंपनी पंजीकृत करा दी थी। उसके बाद से ड्रोन बनाने पर काम कर रहे थे। अब हमारा ड्रोन तैयार है। इसे सरकार की तरफ से मंजूरी मिलने का इंतजार है। मेरा मानना है कि देश में सामान और दवाओं की आपूर्ति के लिए ड्रोन का आवश्यकता तेजी से बढ़ेगी। खासकर पर्वतीय क्षेत्र में ड्रोन खासा काम आएगा। इसलिए हमने 150 रुपये में 40 किलोमीटर दूर तक डिलीवरी देने का लक्ष्य रखा है। इसकी शुरुआत होने के बाद लोगों को बदलाव दिखने लगेगा। फिर देश में ड्रोन क्रांति दिखाई देगी।

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