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डॉक्टरों को जरुरी काम छोड़ गवाही के लिए रोज-रोज नहीं लगाने पड़ेगे अदालत के चक्कर

नई दिल्ली . हेमलता कौशिकसरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के लिए राहत भरी खबर है। आपराधिक मामलों में डॉक्टरों को बतौर गवाह तभी बुलाया जाएगा, जब उनकी गवाही सुनिश्चित होगी। अस्पताल में मरीजों को छोड़कर अथवा जरूरी काम बाधित कर अदालत के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सभी जिला अदालतों में यह नई व्यवस्था दो हफ्ते में लागू हो जाएगी।दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के आदेश के आधार पर दिल्ली की 11 जिला अदालतों में अधिसूचना जारी की गई है। इसके तहत न्यायिक अधिकारियों को कहा गया है कि आपराधिक मामलों में गवाह डॉक्टरों को बेवजह अदालत के चक्कर न लगाने पड़े, इसके लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए। 12 अप्रैल को भेजी गई इस अधिसूचना के तहत कहा गया है कि कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार दो हफ्ते में इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से लागू करना है। यह है नई व्यवस्थाडॉक्टर को गवाही के लिए समन जारी करते समय उस पर संबंधित अदालत के अधिकारी का फोन नम्बर व ई-मेल आईडी डाली जाएगी। इसी तरह डॉक्टर को गवाह बनाते समय उसके बयानों की प्रति के साथ डॉक्टर का फोन नम्बर व ई-मेल आईडी लिखी जाएगी। इससे फायदा यह होगा कि डॉक्टर किसी जरूरी काम में व्यस्त है तो तारीख से पहले ही फोन अथवा मेल से अदालत में गैरहाजिरी बता देगा। अगर न्यायिक अधिाकरी गवाही वाले दिन छुट्टी पर है तो अदालत की तरफ से संबंधित डॉक्टर को तारीख से एक दिन पहले ही फोन के माध्यम से अथवा ई-मेल के माध्यम से अदालत न आने की सूचना दी जाएगी।प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉक्टरों ने परेशानी बताई थी पिछले दिनों दिल्ली सरकार के अस्पतालों के डॉक्टरों को आपराधिक मामलों में चिकित्सा जांच, एमएलसी तैयार करने एवं खासतौर पर नाबालिगों के साथ बलात्कार व उनकी गवाही के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान डॉक्टरों ने अदालतों के बार-बार के चक्कर व मरीजों के उपचार में देरी को लेकर अपनी दिक्कतें बताईं। उन्होंने बताया कि कई बार किसी मरीज का उपचार जरूरी होता है, लेकिन अदालती समन पर उन्हें अदालत जाना पड़ता है। वहां जाकर पता चलता है कि न्यायिक अधिकारी छुट्टी पर हैं। कई बार ऐसा होता है कि गंभीर मरीज के तुरंत उपचार के चलते अगर वह अदालत नहीं पहुंच पाते तो उनके खिलाफ आदेश हो जाते हैं। वहीं, न्यायिक अधिकारियों का तर्क था कि डॉक्टरों के संबंधित गवाही पर न पहुचंने पर सुनवाई में देरी होती है। इन तमाम दिक्क्तों को देखते हुए इस नई व्यवस्था को लागू करने का निर्णय किया गया। ताकि अस्पताल व अदालत दोनों की प्रक्रिया बाधित न हो।पीआरओ और एपीआरओ संभालंगे जिम्मेदारीअधिसूचना में कहा गया है कि सभी जिला अदालतों में जनसंपर्क अधिकारी एवं अतिरिक्त जनसंपर्क अधिकारी गवाही के लिए डॉक्टर व संबंधित अदालत के न्यायिक अधिकारी की उपलब्धता संबंधी जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसकी रिपोर्ट जनसंपर्क अधिकारियों को ही पेश करनी होगी।

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