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खुलासा : देश के 91 फीसदी लोग जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित

देश में 91 फीसदी लोग ऐसे हैं जो जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित हैं। ऐसे लोगों की संख्या वर्ष 2011 में 61 फीसदी, जबकि वर्ष 2022 में 81 फीसदी थी। येल...

खुलासा : देश के 91 फीसदी लोग जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित
हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीSun, 19 May 2024 05:45 PM
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बेंगलुरु, एजेंसी।
देश में 91 फीसदी लोग ऐसे हैं जो जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित हैं। ऐसे लोगों की संख्या वर्ष 2011 में 61 फीसदी, जबकि वर्ष 2022 में 81 फीसदी थी। येल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन और सी वोटर इंटरनेशनल ने अपनी नई रिपोर्ट ‘क्लाइमेट चेंज इन द इंडियन माइंड 2023 में इसका खुलासा किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 71 फीसदी भारतीयों का मानना है कि वैश्विक तापमान में होता इजाफा उनके क्षेत्र में मौसम को प्रभावित कर रहा है। वहीं 76 फीसदी लोग इस बात को मानते हैं कि बढ़ता तापमान कहीं न कहीं देश में मानसून पर असर डाल रहा है। बढ़ते तापमान को लेकर चिंतित लोगों में 59 फीसदी वो लोग हैं जो जलवायु परिवर्तन को लेकर बहुत ज्यादा चिंता महसूस करते हैं। हालांकि, महज 33 फीसदी ने इस बात को स्वीकार किया है कि वो सप्ताह में कम से कम एक बार मीडिया में ग्लोबल वार्मिंग के बारे में सुनते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, जलवायु परिवर्तन और दुनिया में बढ़ता तापमान, ऐसी हकीकतें हैं जिन्हें चाह कर भी झुठलाया नहीं जा सकता। आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं, इस साल के पहले चारों महीने में तापमान नए शिखर पर पहुंच गया है। यह स्पष्ट तौर पर दर्शाता है कि हमारा ग्रह पहले से कहीं ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है। राष्ट्रीय सर्वेक्षण में शामिल ज्यादातर भारतीयों ने माना है कि वैश्विक तापमान में इजाफा हो रहा है। जो देश के लिए गंभीर खतरा है। साथ ही लोगों ने जलवायु परिवर्तन पर सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई का समर्थन किया है।

इंसानी गतिविधियों को जिम्मेदार बताया

लोगों से जब जलवायु परिवर्तन के कारणों के बारे में पूछा गया तो 52 फीसदी का कहना था कि इसके लिए इंसानी गतिविधियां जिम्मेवार हैं। वहीं, 38 फीसदी लोग सोचते हैं कि यह प्राकृतिक रूप से बदलावों के कारण होता है। हालांकि, जब उन्हें ग्लोबल वार्मिंग के बारे में बताया गया, साथ ही इस बात की जानकारी दी गई कि यह मौसम के पैटर्न को कैसे प्रभावित कर रहा है तब 78 फीसदी लोगों का कहना था कि उन्हें लगता है कि वैश्विक तापमान में इजाफा हो रहा है। इस सर्वे में जब ग्लोबल वार्मिंग के बारे में पूछा गया तो 54 फीसदी लोगों का जवाब था कि वो इसके बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं। वहीं दस फीसदी का कहना था कि वो इससे अच्छी तरह परिचित हैं।

यह वर्ष हो सकता है सबसे गर्म

वैज्ञानिकों ने वर्ष 2024 के सबसे गर्म वर्ष होने की 61 फीसदी आशंका जताई है। वहीं, 2024 का पांच सबसे गर्म वर्षों में शामिल होना करीब-करीब तय माना जा रहा है। इसका नजारा अप्रैल और मई की शुरूआत में भी देखा गया जब देश दुनिया के कई हिस्सों में तापमान ने नए रिकॉर्ड बनाए। बांग्लादेश, फिलीपींस और दक्षिण सूडान में तो इसकी वजह से स्कूल तक बंद करने पड़ गए। भारतीय मौसम विभाग ने भी पुष्टि की है कि 1901 के बाद से पूर्वी भारत के लिए यह अब तक का सबसे गर्म अप्रैल था। इसी तरह पश्चिम बंगाल में पिछले 15 वर्षों के दौरान अप्रैल 2024 में सबसे ज्यादा लू वाले दिन दर्ज किए गए। ओडिशा में भी अप्रैल के दौरान गर्मी की स्थिति पिछले नौ वर्षों में सबसे खराब रही।

सरकार के ‘नेट जीरो लक्ष्य का समर्थन किया

86 फीसदी भारतीयों ने वर्ष 2070 तक कार्बन प्रदूषण को शून्य पर लाने के भारत सरकार के ‘नेट जीरो लक्ष्य का समर्थन किया हैं। वहीं, 67 फीसदी का मानना है कि भारत के अधिकांश कोयले को जमीन में रहने देना स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका है। इसी तरह सर्वे में शामिल 84 फीसदी भारतीय नए कोयला बिजली संयंत्रों पर प्रतिबंध लगाने, मौजूदा संयंत्रों को बंद करने और सौर एवं पवन ऊर्जा को अपनाने का समर्थन करते हैं। 74 फीसदी लोगों का सोचना है कि ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। 51 फीसदी का मानना है कि इससे नए रोजगार पैदा होंगें। दूसरी तरफ 23 फीसदी का विचार है कि इससे रोजगार और आर्थिक विकास पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं 21 फीसदी सोचते हैं कि इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा और नौकरियां खत्म हो जाएंगी।

अक्षय ऊर्जा के पक्ष में दिखे

अक्षय ऊर्जा को लेकर भी भारतीयों में ज्यादातर ने सकरात्मक रुख दर्शाया है। रिपोर्ट के मुताबिक 61 फीसदी का मानना है की देश में अक्षय ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। वहीं महज 14 फीसदी ने भारत में जीवाश्म ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही है। इतना ही नहीं 75 फीसदी लोग ग्लोबल वार्मिंग और उसकी लागत को कम करने के लिए ऊर्जा-दक्ष उपकरणों और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार हैं।

कोट:::

भारतीय स्वच्छ ऊर्जा बदलावों का पुरजोर समर्थन करते हैं। इसे अर्थव्यवस्था एवं उनके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिकांश लोग कार्बन प्रदूषण को खत्म करने के 2070 के नेट जीरो लक्ष्य का समर्थन करते हैं। साथ ही वो इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए व्यक्तिगत रूप से कार्रवाई करने को भी तैयार हैं। - डॉक्टर जगदीश ठाकर, क्वींसलैंड विश्वविद्यालय

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