आपदा में ‘शून्य जनहानि’ लक्ष्य के लिए केंद्र राज्य समन्वय बढ़ाने की कवायद
आपदा में ‘शून्य जनहानि’ लक्ष्य के लिए केंद्र राज्य समन्वय बढ़ाने की कवायद - गृह मंत्रालय के इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम फॉर इमरजेंसी रिस्पॉन्स ने राज्यों के आपात संचालन केंद्रों के साथ समन्वय पर तीसरा...

आपदा में ‘शून्य जनहानि’ लक्ष्य के लिए केंद्र राज्य समन्वय बढ़ाने की कवायद - गृह मंत्रालय के इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम फॉर इमरजेंसी रिस्पॉन्स ने राज्यों के आपात संचालन केंद्रों के साथ समन्वय पर तीसरा सेमिनार आयोजित किया- आपदा प्रबंधन में एआई का उपयोग बढ़ाने पर जोरनई दिल्ली। विशेष संवाददाताआपदा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने तथा राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्रालय के इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम फॉर इमरजेंसी रिस्पॉन्स (आईसीआर-ईआर) ने राज्यों के स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (एसईओसी) के साथ एकीकरण पर तीसरे सेमिनार का आयोजन किया। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आपदा जोखिम न्यूनीकरण के 10 सूत्रीय एजेंडा को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।सेमिनार
में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक आपदा प्रबंधन की मौजूदा कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव ला सकती है और राहत व बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकती है।गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सरकार का लक्ष्य आपदाओं के दौरान “शून्य जनहानि” सुनिश्चित करना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस सेमिनार में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एसईओसी तथा आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया।सेमिनार के दौरान आपदाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं के त्वरित प्रसार के लिए आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर चर्चा की गई। इस अवसर पर नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी), भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी), राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने आपदा प्रबंधन तथा अर्ली वार्निंग सिस्टम से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी और सुझाव साझा किए।कार्यक्रम में नेशनल डेटाबेस फॉर इमरजेंसी मैनेजमेंट (एनडीईएम 5.0) पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया। इस दौरान आपदाओं की पूर्व आशंका, जोखिम कम करने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और केंद्र व राज्यों के बीच सूचनाओं के सुचारु आदान-प्रदान को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।इसके साथ ही मॉनसून-2026 की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। गृहमंत्रालय ने कहा , इस कार्यक्रम ने केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान किया, जिससे आपदा प्रबंधन में केवल राहत आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर रोकथाम और पूर्व तैयारी पर आधारित रणनीति अपनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
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