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 दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की हकीकत को दी है आवाज

दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की हकीकत को दी है आवाज

संक्षेप:

दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की हकीकत को दी है आवाज- कार्यकर्ताओं का एक तबका उनके बयान के साथ- दिग्विजय को बेटे और अपने भविष्य की भी चिंतानई दिल्ली विशेष संवाददातासंगठन सृजन कार्यक्रम के तहत देश भर में...

Dec 27, 2025 07:51 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की हकीकत को दी है आवाज - कार्यकर्ताओं का एक तबका उनके बयान के साथ - दिग्विजय को बेटे और अपने भविष्य की भी चिंता नई दिल्ली विशेष संवाददाता संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत देश भर में जिला स्तर पर नए सिरे से संगठन तैयार करने की कोशिशों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने नई बहस छेड़ दी है। मनरेगा पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से पहले उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भाजपा आरएसएस से सीख लेने की सलाह दी । दिग्विजय सिंह सिर्फ इतने पर नहीं रुके।

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सीडब्लूसी की बैठक में भी उन्होंने संगठन का मुद्दा उठाया। सूत्रों के मुताबिक दिग्विजय सिंह ने बैठक मेंपार्टी के अंदर सत्ता के केंद्रीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि संगठन में सत्ता का विकेंद्रीकरण जरूरी है।प्रदेशों में अध्यक्ष तो बताया जाता है लेकिन कमिटी का गठन नहीं किया जाता है। वरिष्ठ नेता के संगठन की शक्ति को लेकर कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत को जमीनी स्तर पर काम करने वाले कैडर की कमी पर कटाक्ष माना जा रहा है। यह सवाल कांग्रेस के भीतर काफी दिनों से उठता रहा है कि कांग्रेस के अंदर समर्पित कार्यकर्ता और स्थानीय नेताओं की कमी है। पार्टी के अंदर एक तबका दिग्विजय सिंह की दबी ज़बान में हिमायत कर रहा है। ऐसे में उन्होंने जो कहा है वह कांग्रेस के भीतर गहरे बैठे असंतोष की सार्वजनिक अभिव्यक्ति मानी जा रही है। पर पार्टी के अंदर एक गुट इस बयान को उनके बेटे और खुद उनके भविष्य से जोड़कर भी देख रहा है। दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह विधायक और जिलाध्यक्ष है। पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधायक दल के नेता उमंग सिगार दल दोनों दिग्विजय सिंह के विरोधी माने जाते है। ऐसे में उन्हें लगता है कि बेटे के लिए राह आसान नहीं जा। यही वजह है उन्हें अपने बेटे के भविष्य की चिंता सता रही है। इसके साथ दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल भी जल्द पूरा होने वाला है। ऐसे में आरएसएस और भाजपा के धुर विरोधी माने जाने वाले दिग्विजय सिंह के इस बयान को दबाव की राजनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।