
एयर इंडिया पायलटों ने तकनीकी गड़बड़ी को नजरअंदाज कर भरी उड़ान, नोटिस जारी
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-358 में गंभीर सुरक्षा खामियों का पता लगाया है। पायलटों ने धुएं जैसी गंध आने पर भी उड़ान भरी। जांच में पता चला कि तकनीकी मानकों का उल्लंघन किया गया। इस मामले में पायलटों को 14 दिनों में जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-358 और उससे जुड़ी उड़ानों के संचालन में गंभीर सुरक्षा खामियों को पकड़ा है। विमान में धुएं जैसी गंध आने के बाद भी पायलट विमान से उड़ान भरते रहे। जांच के बाद डीजीसीए ने पाया कि संचालन के दौरान विमान डिस्पैच, न्यूनतम उपकरण सूची (एमईएल) के पालन और क्रू के निर्णय लेने से जुड़े गंभीर सुरक्षा लापरवाही सामने आई। इस मामले में डीजीसीए ने एयर इंडिया के पायलटों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 14 दिनों में जवाब मांगा है। डीजीसीए के अनुसार कई मामले में उड़ान के दौरान पायलटों ने चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया।
लेफ्ट एयर साइकिल मशीन और पैक मोड से जुड़ी चेतावनी मिली। साथ ही आर2 दरवाजे के पास धुएं जैसी गंध की शिकायत भी हुई। फिर भी विमान ऑपरेट किया गया। इसी सिस्टम से जुड़ी खराबियां पहले की पांच उड़ानों में भी दर्ज की गई थीं, जिन प्रणालियों में खराबी पाई गई, उन्हीं से जुड़ी दिक्कतें विमान की पिछली पांच उड़ानों में भी दर्ज की जा चुकी थीं। इससे यह साफ होता है कि सिस्टम की स्थिति पहले से खराब थी। उल्लंघन जांच में यह भी सामने आया कि विमान वीटी-एएनआई को ऐसे एमईएल उपकरणों के साथ उड़ान के लिए मंजूरी दी गई, जो नियमों के अनुकूल नहीं थे, जो नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं (सीएआर) के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। वीटी-एएनआई वह नंबर है जो भारत में पंजीकृत विमानों को दिया जाता है। डीजीसीए इसी नंबर के आधार पर विमान को ट्रैक करती है। जानकारी के अनुसार, यह नोटिस दिल्ली से टोक्यो जाने वाली फ्लाइट एआई-357 और टोक्यो से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट एआई-358 के संचालन से संबंधित है। यह घटना जून 2025 की बताई जा रही है। तब विमान के अंदर तापमान बढ़ने के बाद उसे कोलकाता डाइवर्ट करना पड़ा था। विमान में जरूरी तकनीकी मानकों की कमी थी नोटिस के अनुसार, विमान के लिए लागू मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट (एमईएल) सही नहीं पाई गई यानी इसमें जरूरी तकनीकी मानकों में कमी थी। इसके बावजूद पायलटों ने बार-बार सामने आ रही तकनीकी खराबियों को नोटिस किया, लेकिन उड़ान भरने से इनकार नहीं किया। इतना ही नहीं, क्रू ने एनईएल की सीमाओं और सिस्टम की आपसी निर्भरता को ठीक से नहीं समझा। उन्होंने विमान में कई स्तर पर आ रही तकनीकी खराबी की सही से आकलन नहीं किया, जो दर्शाता को ही पायलट और क्रू की तरफ से यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालकर उड़ान भरी। दिल्ली-मुंबई उड़ान का इंजन बंद होने की भी चल रही जांच पिछले महीने दिल्ली से मुंबई जा रही एयर इंडिया की उड़ान में टेक ऑफ के बाद इंजन बंद होने की घटना सामने आई थी। बी777-300ईआर विमान तकनीकी समस्या के कारण उड़ान के कुछ देर बाद ही दिल्ली वापस लौट आया था और सुरक्षित रूप से उतर गया। डीजीसीए ने बताया कि टेकऑफ के बाद फ्लैप बंद करते वक्त पायलटों ने दाएं इंजन में ऑयल प्रेशर कम पाया था। बताया कि इस मामले में जांच जारी है। घटना की जांच एयरलाइन की स्थायी जांच समिति द्वारा की जाएगी, जो डीजीसीए के डायरेक्टर एयर सेफ्टी (एनआर) की निगरानी में काम करेगी।

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